राजमहल कोल परियोजना के लौहंडिया पुनर्वास स्थल पर ग्रामीणों ने मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित कर विधि विधान से पूजा-अर्चना की. समिति सदस्यों ने मां का पंडाल प्रयागराज संगम तीर्थ स्थल के थीम पर सजाया, जो इस अवसर का मुख्य आकर्षण बना. दूर-दराज के क्षेत्रीय ग्रामीण भी माता का दर्शन करने पहुंचे और पंडाल की रचनात्मक सजावट की जमकर प्रशंसा की. समिति सदस्य शंभू मास्टर, बास्की मास्टर, आशीष कर्मकार, मनीष कर्मकार और आयुष कर्मकार ने बताया कि हिंदू धर्म के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल के थीम को बंगाल के प्रसिद्ध कलाकार द्वारा तैयार किया गया है. प्रखंड के श्रीपुर बाजार, बोआरीजोर, राजाभिट्ठा, ललमटिया, सिदो-कान्हू आदर्श विद्यालय और शिशु विद्या मंदिर में भी माता सरस्वती की प्रतिमा स्थापित कर पूजा अर्चना का आयोजन किया गया. बच्चों ने माता के समक्ष अपनी कॉपी और किताबें रखकर विद्या की आशीर्वाद प्राप्त करने की प्रार्थना की. पंडित अंकेश उपाध्याय ने इस अवसर पर कहा कि मां सरस्वती को विद्या दायिनी और हंस वाहिनी के रूप में जाना जाता है. उन्होंने कहा कि मां का हृदय अत्यंत कोमल है और सच्चे मन से प्रार्थना करने वाले कभी निराश नहीं होते. सुबह से ही पूजा-अर्चना के दौरान ग्रामीणों में उत्साह और श्रद्धा का भाव देखने को मिला. पंडालों की सजावट, भजन-कीर्तन और बच्चों का सहयोग इस अवसर को और अधिक भक्तिमय और यादगार बना गया.
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