प्रतिनिधि, हनवारा महागामा प्रखंड के कुशमहारा में जारी सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के छठे दिन कथा व्यास अभिषेक आनंद जी महाराज ने विभिन्न प्रसंगों पर प्रवचन दिए. इस दिन श्रीकृष्ण की अलग-अलग लीलाओं का विस्तार से वर्णन किया गया. उन्होंने बताया कि किस प्रकार मां देवकी के कहने पर उनके छह पुत्रों को वापस लाकर उन्हें सौंपा गया. सुभद्रा हरण और सुदामा चरित्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने मित्रता के महत्व पर प्रकाश डाला. कथा व्यास अभिषेक आनंद जी महाराज ने कहा कि सच्ची मित्रता कैसी होनी चाहिए, यह भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा से सीखा जा सकता है. उन्होंने बताया कि सुदामा अपनी पत्नी के आग्रह पर अपने मित्र श्रीकृष्ण से मिलने द्वारिका पहुंचे. वहां उन्होंने द्वारिकाधीश के महल का पता पूछा और जैसे ही महल की ओर बढ़े, द्वारपालों ने उन्हें भिक्षुक समझकर रोक दिया. जब सुदामा ने कहा कि वे श्रीकृष्ण के मित्र हैं, तब द्वारपालों ने भीतर जाकर भगवान से यह बात कही. जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण ने सुना कि सुदामा उनसे मिलने आए हैं, वे “सुदामा… सुदामा… ” कहते हुए महल के द्वार की ओर दौड़ पड़े. उन्होंने सुदामा को देखते ही गले से लगा लिया. सुदामा ने भी “कन्हैया… कन्हैया… ” पुकारते हुए अपने मित्र को गले लगाया. श्रीकृष्ण उन्हें अपने महल में ले गए और पूरे आदर-सम्मान के साथ उनका अभिनंदन किया. इस भव्य प्रसंग की झांकी के दर्शन के लिए ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. सुंदरचक, मालियाचक, अंजना और कारिया समेत आसपास के गांवों के श्रद्धालु इस दिव्य कथा को सुनने पहुंचे. माहौल भक्ति और भावनाओं से सराबोर हो गया.
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