ठाकुरगंगटी प्रखंड स्थित हरिदेवी रेफरल अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति बेहद दयनीय हो गयी है. अस्पताल में जन सुविधाओं का अभाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, जिससे मरीजों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. यह अस्पताल जिला मुख्यालय से दूरवर्ती क्षेत्र में स्थित होने के बावजूद साहिबगंज एवं भागलपुर सीमावर्ती क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मरीज यहां इलाज के लिए पहुंचते हैं. इसके बावजूद स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में कोई ठोस सुधार नजर नहीं आ रहा है. 30 शैय्या वाले इस अस्पताल में चिकित्सकों के चार पद स्वीकृत हैं, लेकिन सभी पद रिक्त बताए जा रहे हैं. वर्तमान में केवल डिप्टेशन के माध्यम से व्यवस्था संचालित की जा रही है. अस्पताल में महिला चिकित्सक का पद भी रिक्त है. चार एएनएम के पद के विरुद्ध मात्र एक एएनएम डिप्टेशन पर कार्यरत हैं. इसके अलावा लैब टेक्नीशियन, आदेशपाल और रात्रि प्रहरी जैसे महत्वपूर्ण पद भी रिक्त पड़े हैं. ड्रेसर की अनुपस्थिति के कारण दुर्घटना में घायल मरीजों के प्राथमिक उपचार में भी कठिनाई होती है.
प्रसव सेवाओं पर भी असर
अस्पताल में प्रतिदिन औसतन दस महिलाओं का संस्थागत प्रसव होता है, लेकिन महिला चिकित्सक की अनुपस्थिति के कारण प्रसव सेवाएं प्रभावित हो रही हैं. वर्तमान में डीएमएफटी और एनएचएम के तहत कार्यरत जीएनएम एवं अन्य कर्मियों के सहयोग से प्रसव कार्य किसी तरह संचालित किया जा रहा है. अस्पताल परिसर में पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं की भी गंभीर कमी है. लंबे समय से सामुदायिक शौचालय की मांग के बावजूद कोई ठोस पहल नहीं की गयी है. इसके कारण मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है. अस्पताल में कर्मचारियों के लिए आवासीय सुविधा नहीं होने से उन्हें अन्य स्थानों पर रहने को मजबूर होना पड़ता है, जिसे गंभीर समस्या बताया जा रहा है.
मरीजों को करना पड़ता है रेफर का सामना
अस्पताल में आवश्यक उपकरणों और विशेषज्ञ सेवाओं की कमी के कारण कई मरीजों को बेहतर इलाज के लिए अन्य अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है, जिससे उन्हें अतिरिक्त समय और आर्थिक बोझ झेलना पड़ता है. अस्पताल के प्रधान लिपिक सुधीर कुमार मुर्मू ने बताया कि स्टाफ की कमी के कारण कार्य संचालन प्रभावित हो रहा है. उन्होंने महिला चिकित्सक और अन्य कर्मियों की कमी की पुष्टि की है. वहीं प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. विवेक कुमार सिन्हा ने बताया कि महिला चिकित्सक के अभाव में जीएनएम के सहयोग से मरीजों का इलाज किया जा रहा है तथा आवश्यकता अनुसार सलाह दी जाती है.
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