सहकारिता विभाग गोड्डा की कथा अनंत है. विभाग के पदाधिकारी पूरी तरह से सरकार के नियम व कानून को अपने तरीके से संचालित करते हैं. ये बात विभाग के कर्मी के साथ-साथ जिले भर के लैंपस व पैक्स संचालक की ओर से कहा जा रहा है. विभाग द्वारा कई ऐसे कार्य हैं, जिसे सरकार की ओर से आय बढ़ोतरी के साथ-साथ किसानों को लाभ दिये जाने के लिए संचालित करने के निर्देश हैं. इसके बावजूद अब तक धरातल स्तर पर उतरने नहीं दिया जा रहा है. विगत नौ माह से जिले के 156 लैंपस व पैक्स के सदस्यों को अब तक खाद व बीज के लाइसेंस के लिए ट्रेनिंग नहीं दी जा सकी है, जबकि सरकार की ओर से विभाग को करीब 17 लाख रुपये प्राप्त है. इसे अब तक खर्च नहीं किया गया है. प्रशिक्षण नहीं किये जाने से जिलेभर के कई लैंपस व पैक्स का आरोप है, अगर लाइसेंस के लिए प्रशिक्षण दिया जाता, तो उन्हें दुकान के माध्यम से आर्थिक लाभ होता. विभाग की ओर से अब पैसे खर्च किये जाने काे लेकर प्रशिक्षण देने के प्रति उत्सुकता बढ़ी है.
क्या है पूरा मामला
जिले भर में जिला सहकारिता विभाग की ओर से कुल 203 लैंपस व पैक्स संचालित है. हालांकि अब इन संस्थानों का नाम बहुउद्देशीय प्राथमिक सहकारी समिति लिमिटेड के नाम से जाना जाता है. ऐसे में कुल 156 बहुउद्देशीय समिति के एक-एक सदस्य को जून-जुलाई माह से ही प्रशिक्षण दिया जाना था. खरीफ व रबी की फसल के वक्त ही जिले में बीज व उर्वरक की सर्वाधिक होती है. मगर फरवरी माह बीत जाने के करीब है, अंदरखाने से जानकारी मिल रही है कि अब विभाग को ट्रेनिंग कराने पर फाेकस दिया जा रहा है.पिछले वित्तीय वर्ष में दी गयी थी 15 दिनों की आवासीय ट्रेनिंग
जिला सहकारिता विभाग द्वारा गत वित्तीय वर्ष में जिले के 203 में से 45 की आवासीय ट्रेनिंग केवीके द्वारा दी गयी थी. इसमें एक-एक सदस्य को ट्रेनिंग दी गयी थी. 15 दिनों के इस ट्रेनिंग को डिप्लोमा सर्टिफिकेट कोर्स कहा जाता है. खाद व बीज के लाइसेंस के लिए दो बातें जरूरी है. इसमें डिप्लोमा कोर्स किया गया हो या फिर रसायन विभाग में डिग्रीधारी हो. इस बार अब तक एक भी ट्रेनिंग नहीं दी गयी है. मगर ट्रेनिंग के लिए केवीके से संपर्क किया जा रहा है. साथ ही विभाग की ओर से शहर के किसी कंप्यूटर ट्रेनिंग सेंटर में खाद व बीज के लाइसेंस के लिए प्रशिक्षण कराने की तैयारी की जा रही है.पिछले वित्तीय वर्ष में 45 के बैच को आवासीय ट्रेनिंग दी गयी थी. इनमें लोगों के रहने व खाने के खर्च की अदायगी जिला सहकारिता विभाग की ओर से की गयी थी. इस वित्तीय वर्ष में अब तक जिला कॉपरेटिव विभाग की ओर से ट्रेनिंग नहीं दी गयी है. फिलहाल 35 का प्रपोजल प्रशिक्षण के लिए प्राप्त हुआ है.– डॉ रविशंकर, प्रधान कृषि वैज्ञानिक केवीके गोड्डा
पिछले वर्ष प्रशिक्षण की व्यवस्था की गयी थी. इस वर्ष अब तक प्रशिक्षण नहीं दी गयी है. प्रशिक्षण का समय अभी है. प्रशिक्षण कराने के लिए पहल शुरू की गयी है. सरकार की ओर से विभाग को राशि प्राप्त है. जल्द ही प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की जायेगी.
– विजय नाग, जिला सहकारिता पदाधिकारीB
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