गोड्डा, संवाददाता निरभ किशोर. राष्ट्रीय खेल दिवस पर जहां खेल प्रेमियों में उत्साह है, वहीं गोड्डा के अंतरराष्ट्रीय एथलीट पवन कुमार सिंह की खेल यात्रा युवाओं के लिए प्रेरणा बनी हुई है. गोला फेंक में लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए कई राष्ट्रीय, राज्य और जोनल स्तर के पदक जीत चुके पवन सिंह ने अपनी मेहनत और जुनून से जिले के साथ राज्य और देश का नाम रोशन किया है.
पवन कुमार सिंह की खेल यात्रा वर्ष 1989 से लगातार जारी है. गोड्डा के गांधी मैदान से एक सामान्य खिलाड़ी के रूप में शुरू हुआ उनका सफर आज अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुका है. गोला फेंक में उन्होंने कई प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक हासिल कर अपनी अलग पहचान बनाई है.
गांधी मैदान से शुरू हुआ सफर, राष्ट्रीय मंच तक पहुंचा
पवन सिंह ने गोड्डा में दसवीं तक की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद बोकारो से इंटर और दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए की पढ़ाई की. पढ़ाई के साथ खेल के प्रति उनका जुनून लगातार बढ़ता गया.
संयुक्त बिहार के समय उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की गोला फेंक प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू किया. वर्ष 1992 में कर्नाटक के कोलार में आयोजित प्रतियोगिता में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया. इसके बाद 1993 में कोलकाता में जोनल चैंपियनशिप और 1994 में हरिद्वार समेत विभिन्न प्रतियोगिताओं में लगातार सफलता हासिल की.
उनके नाम राष्ट्रीय स्तर पर तीन स्वर्ण, राज्य स्तर पर 12 स्वर्ण और जोनल स्तर पर दो स्वर्ण पदक दर्ज हैं.
16.31 मीटर का रिकॉर्ड आज भी बरकरार
पवन कुमार सिंह की सबसे बड़ी उपलब्धियों में वर्ष 1995 में बनाया गया 16.31 मीटर का रिकॉर्ड शामिल है. बिहार में राष्ट्रीय स्तर की गोला फेंक प्रतियोगिता में बनाया गया यह रिकॉर्ड आज भी कायम है.
तीन दशक से अधिक समय बीतने के बावजूद कोई खिलाड़ी इस रिकॉर्ड को नहीं तोड़ सका है. यही उपलब्धि पवन सिंह को गोड्डा के प्रमुख खिलाड़ियों में अलग पहचान दिलाती है.
चेन्नई में भारत का किया प्रतिनिधित्व
खेल के प्रति उनका जुनून उम्र के साथ कम नहीं हुआ. नवंबर 2025 में तमिलनाडु के चेन्नई में आयोजित 23वीं एशिया मास्टर चैंपियनशिप में पवन सिंह ने भारत का प्रतिनिधित्व किया. अंतरराष्ट्रीय स्तर की इस प्रतियोगिता में देश का प्रतिनिधित्व करना उनके लंबे खेल सफर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है.
सम्मान और सरकारी सहयोग नहीं मिलने का मलाल
लगातार उपलब्धियां हासिल करने के बावजूद पवन सिंह को अपेक्षित सरकारी सम्मान और सहयोग नहीं मिलने का मलाल है. उनका कहना है कि जिस तरह हरियाणा और पंजाब जैसे राज्यों में खिलाड़ियों को नौकरी और सम्मान दिया जाता है, वैसा सहयोग उन्हें नहीं मिल पाया.
उन्होंने तत्कालीन उपायुक्त किरण पासी का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2019 के चुनाव के दौरान उन्हें जिला आइकॉन बनाया गया था. इससे उन्हें काफी गर्व और सम्मान का अहसास हुआ. हालांकि, वह आज भी सरकारी स्तर पर खिलाड़ियों को मिलने वाले बेहतर अवसर और सम्मान की उम्मीद रखते हैं.
युवाओं को नशे से दूर रहने की अपील
राष्ट्रीय खेल दिवस और हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की जयंती के अवसर पर पवन कुमार सिंह ने सभी खिलाड़ियों, खेल प्रेमियों और खेल संगठनों को शुभकामनाएं दीं.
उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहने और खेल को जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की. उन्होंने कहा कि युवा खेलों के माध्यम से न केवल खुद को स्वस्थ रख सकते हैं, बल्कि देश और समाज का नाम भी रोशन कर सकते हैं. फिट इंडिया को मजबूत बनाने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है.
