बोआरीजोर प्रखंड कार्यालय के पास वन विभाग की ओर से लाखों रुपये की लागत से लगभग सात वर्ष पूर्व तत्कालीन रेंजर रामचंद्र पासवान द्वारा चेक नाका बनाया गया. इसका मुख्य उद्देश्य लकड़ी तस्करी को रोकना था. इस चेक नाका पर फॉरेस्ट गार्ड प्रत्येक दिन जांच कर रहा था. लेकिन चेकनाका बनने के बाद उदघाटन भी नहीं हुआ और इसके बनाने का उद्देश्य पूरा नहीं हुआ. इसके निर्माण में लाखों रुपया बर्बाद हो गया. चेक नाका में चारों तरफ जंगल उग गया है और कमरे के अंदर भी झाड़ी हो गया है. वन विभाग के पदाधिकारी द्वारा इसकी सुध नहीं ली जा रही है. विभाग के कर्मी ऊर्जा नगर आवासीय कॉलोनी में रह रहे हैं. सुदूर क्षेत्र जाना नहीं चाह रहा है, जिससे लकड़ी की तस्करी धड़ल्ले से हो रही है. इसमें विभाग की नाकामी दिखाई पड़ रही है. इस संबंध में रेंजर संजय कुमार ने बताया कि चेक नाका के बारे में जानकारी ली जा रही है. जल्द उचित कार्रवाई की जाएगी.
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