गोड्डा कॉलेज में मंगलवार को विज्ञान सभागार में हैप्पीनेस एंड वेल बीइंग संघ की ओर से एक दिवसीय अवेयरनेस कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को मानसिक स्वास्थ्य और तनाव प्रबंधन के प्रति जागरूक करना था. यह आयोजन सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः के संकल्प के साथ संपन्न हुआ. कार्यक्रम का उद्घाटन प्राचार्य प्रो. विवेकानंद सिंह, सेवानिवृत्त व्याख्याता प्रो. फिरोज अख्तर, डॉ. रंजन कुमार और को-ऑर्डिनेटर डॉ. सरफराज इस्लाम ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित करके किया. संगोष्ठी में कॉलेज के व्याख्याता और छात्र-छात्राओं ने सक्रिय भागीदारी दिखायी.
आधुनिक जीवनशैली और मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा
मुख्य अतिथि प्रो. फिरोज अख्तर ने कहा कि आधुनिक जीवन में भौतिक सुख जुटा लिए गए हैं, लेकिन आंतरिक शांति और स्वास्थ्य पीछे रह गये हैं. उन्होंने बताया कि तनाव आज सबसे बड़ी महामारी बन गया है. छात्र-छात्राओं को प्राकृतिक और स्थानीय भोजन अपनाने, डिजिटल और सोशल मीडिया से दूरी रखने और रोजाना 30 मिनट व्यायाम करने की सलाह दी. प्राचार्य प्रो. विवेकानंद सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य का अर्थ केवल बीमारी न होना नहीं, बल्कि शारीरिक, मानसिक और सामाजिक सामंजस्य है. उन्होंने कहा कि तब तक विश्व विकसित नहीं माना जा सकता जब तक प्रत्येक व्यक्ति स्वस्थ नहीं होगा. पैनल चर्चा में यह निष्कर्ष निकला कि स्वास्थ्य ही वास्तविक धन है और उपस्थित युवाओं ने शपथ ली कि वे अपनी व्यस्त दिनचर्या में रोज एक घंटा स्वास्थ्य और प्रदूषण मुक्त वातावरण के लिए निकालेंगे.छात्रों की खुशी और कल्याण पर ध्यान
इस कार्यक्रम का आयोजन मानसिक स्वास्थ्य अवेयरनेस सप्ताह के तहत किया गया. समाजशास्त्र की प्रो. श्रेया संगम के नेतृत्व में छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया. भारत के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के आलोक में केंद्रीय उच्च शिक्षा विभाग ने सभी कॉलेजों को निर्देश दिया है कि वे विद्यार्थियों की खुशी और कल्याण पर ध्यान दें. गोड्डा कॉलेज में स्थापित यह संघ छात्रों को पढ़ाई के दबाव से दूर रखकर मानसिक स्वास्थ्य बेहतर बनाने का प्रयास करता है.
