मनरेगा योजना का नहीं हो पा रहा क्रियान्वयन किसानों सिंचाई व्यवस्था से दूर प्रतिनिधि, पोड़ैयाहाट सरकार सिंचाई व्यवस्था को लेकर लाख दावा करें, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है. प्रखंड के किसानों को पूरी तरह से माॅनसून पर निर्भर रहना पड़ता है. प्रखंड के डांडे त्रिवेणी वीयर को छोड़कर अन्य क्षेत्रों के किसानों के लिए सिंचाई व्यवस्था नहीं के बराबर है. किसानों का कहना है कि मनरेगा योजना के तहत बनाये गये 90 प्रतिशत तालाब में बरसात का पानी कुछ महीने तक ही रहता है. क्या कहते हैं किसान किसानों को पूरी तरह माॅनसून पर निर्भर रहना पड़ता है. इस कारण धान के अलावा कोई फसल नहीं लग पाता है. -जयदेव सिंह, ग्रामीण महेशकुतरो. प्रखंड के कस्तूरी सकरी फूलवार एवं पूर्वी क्षेत्रों में सिंचाई व्यवस्था नहीं है. जलस्तर नीचे जाने के कारण कुआं भी सूख चुका है. -तारणी प्रसाद, ग्रामीण गोविंदपुर, देवदांड. अगर सरकार मनरेगा योजना को पूरी तरह तरातल पर उतारेगी तो शायद सिंचाई सुविधा हम ग्रामीणों को नसीब हो पायेगा. -जयंत यादव, ग्रामीण. मनरेगा योजना के तहत करोड़ों की राशि खर्च होती है. लेकिन सिर्फ कागजों पर ही योजना सीमट कर रह जाती है. – विनीता टुडू, ग्रमाीण, सकरी फूलवार. पूरे राज्य में सिंचाई व्यवस्था, गरीबों को आवास, किसानों के हित में लगातार आवाज जेवीएम द्वारा उठाया जाता है. सरकार की योजना धरातल पर नहीं पहुंच पा रही है. -प्रदीप यादव, विधायक पोड़ैयाहाट
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