उम्मीदें //मेहरमा के किसानों की उम्मीद सरकार से , ऐसी सिंचाई व्यवस्था हो कि किसान बैंकों के ऋृण से मिले मुक्ती

तसवीर-34 से 39 तक रिनेम कर किसानों की मेहरमा. मेहरमा प्रखंड कृर्षि के क्षेत्र में जिले में महत्व रखता है. बिहार के सीमा क्षेत्र से सटे इस प्रखंड के लोगों को सिंचाई की व्यवस्था 14 साल् में भी नहीं हो पायी है. किसान अपने खेतों को सिंचित करने की फिराक में खेती का मोका हाथ […]

तसवीर-34 से 39 तक रिनेम कर किसानों की मेहरमा. मेहरमा प्रखंड कृर्षि के क्षेत्र में जिले में महत्व रखता है. बिहार के सीमा क्षेत्र से सटे इस प्रखंड के लोगों को सिंचाई की व्यवस्था 14 साल् में भी नहीं हो पायी है. किसान अपने खेतों को सिंचित करने की फिराक में खेती का मोका हाथ से गंवा बैठते है. क्षेत्र के किसानों की उम्मीदें ”क्षेत्र के किसान 14 वर्षो के बाद इधर दो साल पहले फिर से खुश हुये , गंगा का पानी आने वाला था मगर अब तक वातें बनकर रह गयी है, सरकार इसपर ध्यान दे तो लोग बेंक के ऋृण से बच जाऐंगें”- भारती प्रसाद राम , किसान ” मेहरमा के सोनेपुर जलायाय से लेेकर लकडमारा दह तक को अब तक किसी भी जनप्रतिनिधियों ने नहीं देखा है. कारण किसान दम तोडने को विवश है”-जयप्रकाश राम , किसान ”किसानों को हर हाल में सिचाई मिले इससे ज्यादा उम्मीद नहीं है. जितने भी जल संचय वाले डेम तथा तालाब है जिर्णाधार की जरूरत है”- कुमोद प्रसाद राम , किसान ”क्षेत्र में हर तबके के किसान है, सीमांत से लेकर बउे व लघु भी है बडे किसान से लेकर छोटे सभी पानी की व्यवस्था के अभाव में खेती कार्य को छोडकर पलायन को विवश है”- मो. सिद्धीक , किसान ”हम फसल पैदा किस सिथति में करें , जबकि किसानों के खेत बरसात के दिनों में भी फट जाते है, मानसून के साथ जूआ खेलना अब संभसव नहीं हो पा रहा है”- शंकर प्रसाद, किसान

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