बढ़ौना व रौतारा गांव के लोगों पर टूट पड़ा है दुखों का पहाड़, कई परिवारों में भोजन को लाले, हादसे के शिकार लोगों के परिजनों की फिकर प्रशासन को नहीं
गोड्डा : पोड़ैयाहाट सड़क हादसे में रौतारा व बढ़ौना गांव के मारे गये लोगों के परिवारों की सुधि लेने अब तक कोई नहीं पहुंचा है. घटना के छठे दिन भी गांव में कई घरों के चूल्हे ठंडे पड़े थे. कई परिवार में भूखों मरने की नौबत आ गयी है. क्योंकि जो घर का कमाने वाला था वह हादसे का शिकार हो गया. बता दें कि यहां के अधिकतर परिवार मजदूरी कर अपने परिवार का जीवन यापन करते हैं.
गुरुवार को प्रभात खबर के प्रतिनिधि ने दोनों गांवों का दौरा किया. स्थिति देख किसी का भी दिल पसीज जाय. बच्चों को भूख से रोते, महिला को पति व बच्चों के मौत के गम को लेकर जीते हुए देख कोई भी बिचलित हो सकता है. लेकिन यहां के लोगों के लिए ना तो प्रशासन ना ही कोई जन प्रतिनिधि ही नजरें इनायत कर रहे हैं. मालूम हो कि पोड़ैयाहाट के पास भटौंधा पुल पर हुए हादसे में 15 लोगों की मौत हो गयी है. इनमें से सभी लोग रौतारा व बढ़ौना गांव के ही रहने वाले हैं. एक तो मुफलिसी दूसरा अपनों को खोने का दुख झेल रहे यहां के लोग.
दस हजार नाकाफी
घटना के दिन प्रशासन की ओर से पीड़ित परिवार को दस दस हजार का चेक मुआवजे के तौर पर दिया गया था. ग्रामीणों का कहना है कि यह राशि मृतकों के दाह संस्कार से लेकर घायलों के इलाज में ही खत्म हो गये. श्रद्धकर्म के भी पैसे नहीं जुट पा रहे हैं.
