बांकीकला गांव में करीब 35 घर हैं और यहां की कुल आबादी करीब 300 है, लेकिन इस गांव में स्वच्छ पेयजल की कोई मुकम्मल व्यवस्था नहीं है. मजबूरन सभी एक ही कच्चे जलस्रोत डांड़ी पर निर्भर हैं. गर्मी बढ़ने के साथ ही डांड़ी का जलस्तर भी गिरता जा रहा है और पानी लगातार गंदा होता जा रहा है.
एक किमी दूर से लाना पड़ता है पानी
गांव की सुलेखा देवी, लीलन देवी, ममता देवी, बमेली देवी और कौशल्या देवी आदि ने कहा कि सुबह उठते ही उनकी पहली चिंता पीने का पानी जुगाड़ करने की होती है. उन्हें घर के कामकाज छोड़कर एक किमी दूर से पानी ढोकर लाना पड़ता है.विधायक व विभाग से किया गया है पत्राचार : मुखिया
मुखिया जुखेला बीबी ने कहा कि जलसंकट को दूर करने को ले उन्होंने विधायक कल्पना सोरेन व विभाग से पत्राचार किया है. लेकिन, अभी तक इस दिशा में कोई सकारात्मक पहल शुरू नहीं की गयी है.
