जैन धर्म के सर्वोच्च तीर्थस्थल श्री सम्मेद शिखरजी की पवित्रता, धार्मिक गरिमा और पर्यावरण संरक्षण को लेकर विश्व जैन संगठन ने केंद्र एवं झारखंड सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है. संगठन का आरोप है कि 5 जनवरी 2023 को केंद्रीय वन मंत्रालय द्वारा जारी निर्देशों के बावजूद तीर्थस्थल पर कई स्तरों पर नियमों का उल्लंघन हो रहा है, जिससे इसकी धार्मिक मर्यादा और पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित हो रहा है.
प्रधानमंत्री से लेकर राज्य सरकार तक को भेजी मांग
विश्व जैन संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय जैन ने प्रधानमंत्री कार्यालय, झारखंड के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, वन विभाग, गिरिडीह जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन को संबोधित करते हुए तीर्थस्थल की सुरक्षा एवं व्यवस्था को सुदृढ़ करने की मांग की है. संगठन ने कहा है कि तीर्थराज की पवित्रता बनाए रखने के लिए प्रभावी कदम उठाना जरूरी है.
अनिवार्य पंजीकरण और चेक पोस्ट की मांग
संगठन ने पर्वतराज की वंदना के लिए आने वाले श्रद्धालुओं का अनिवार्य पंजीकरण कराने की मांग की है. इसके अलावा प्रवेश स्थल पर सामानों की जांच के लिए स्कैनर लगाने तथा पुलिस और वन विभाग का संयुक्त चेक पोस्ट स्थापित करने का सुझाव दिया है. साथ ही पर्वत क्षेत्र में बाइक परिचालन पर रोक लगाने, अवैध दुकानों और झुग्गियों को हटाने तथा प्लास्टिक बोतलों समेत प्रतिबंधित सामग्री के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग की गयी है.
सीसीटीवी और सुरक्षा बलों की तैनाती पर जोर
विश्व जैन संगठन ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पर्वतराज और विभिन्न टोंकों पर पर्याप्त संख्या में सीसीटीवी कैमरे लगाने की मांग की है. संगठन का कहना है कि इससे गतिविधियों की निगरानी आसान होगी. साथ ही पर्वत मार्ग और टोंकों पर सुरक्षाकर्मियों की तैनाती सुनिश्चित करने की भी मांग की गयी है.
धार्मिक मर्यादा के विरुद्ध गतिविधियों पर कार्रवाई की मांग
संगठन ने आरोप लगाया है कि कुछ लोग पवित्र टोंकों और मंदिर परिसरों में पहुंचकर फिल्मी गानों पर रील और वीडियो बना रहे हैं, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं. ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई करने और तीर्थस्थल की मर्यादा बनाए रखने की मांग की गयी है.
आंदोलन की चेतावनी
विश्व जैन संगठन ने कहा है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन पूर्व की भांति देशव्यापी आंदोलन शुरू करने को बाध्य होगा. संगठन ने स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर इसकी जिम्मेदारी केंद्र और राज्य सरकार की होगी.
