हाईकोर्ट के स्टे के बावजूद रैयतों ने खुद हटाये मकान, सरिया ROB निर्माण में तेजी की उम्मीद

झारखंड के सरिया में रेल ओवरब्रिज निर्माण के लिए रैयतों ने हाईकोर्ट के स्टे के बावजूद जनहित में खुद अपने मकान हटाए, जिससे जाम से मिलेगी बड़ी राहत.

सरिया रेलवे फाटक 20 बी (3) टी के समीप रेल ओवरब्रिज (आरओबी) निर्माण में बाधक बने मकानों को रैयतों ने हाईकोर्ट के स्टे के बावजूद स्वयं तोड़कर अतिक्रमण हटा लिया. रैयतों के इस फैसले से सड़क मार्ग पर आवागमन सुगम होने के साथ 73 करोड़ रु की लागत के आरओबी निर्माण में भी तेजी आने की उम्मीद है.

अब जाम से निजात मिलने की उम्मीद जगी

सरिया रेलवे फाटक पर ट्रेनों के आवागमन के कारण अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती थी. इससे सरिया बाजार की गतिविधियां भी प्रभावित होती थीं. जाम में स्कूली बच्चे, एंबुलेंस, दूध और सब्जी के वाहन समेत मालवाहक वाहन घंटों फंसे रहते थे. इस समस्या के समाधान के लिए केंद्र सरकार की योजना के तहत रेल ओवरब्रिज निर्माण की प्रक्रिया शुरू की गई थी.

जमीन की प्रकृति के कारण मुआवजा नहीं मिल सका

इससे पहले संबंधित विभाग ने भूमि अधिग्रहण किया था. रैयतों के अनुसार, अधिग्रहण के दौरान उनकी जमीन की प्रकृति को लेकर हुई विसंगतियों के कारण उन्हें मुआवजा नहीं मिल सका. इसके विरोध में कुछ रैयतों ने वर्ष 2021 में झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और मुआवजा भुगतान की मांग की. मामले में हाईकोर्ट ने स्टे ऑर्डर जारी किया था. इसके बाद ROB निर्माण की गति प्रभावित हुई.

रैयतों के कदम को लोगों ने सराहा

इसी बीच आम लोगों की परेशानी और निर्माण में हो रहे विलंब को देखते हुए रैयत अर्जुन महतो, सुदामा मोदी, बालेश्वर मोदी, गणपति समाजदार, बाल गोविंद कुशवाहा समेत अन्य ने अपने मकान और अन्य संरचनाएं स्वयं हटाने का निर्णय लिया. रैयतों के इस कदम से सड़क पर आवागमन की समस्या कम हुई है और स्थानीय लोगों ने उन्हें बधाई दी है.

राज्य सरकार और रेलवे ने किया था कोर्ट का रुख

बताया गया कि 24 अगस्त को झारखंड हाईकोर्ट में न्यायाधीश आनंद सेन की अदालत में मामले की सुनवाई हुई थी. सुनवाई के दौरान झारखंड सरकार और रेलवे की ओर से जनहित में मकान हटाने तथा स्टे ऑर्डर हटाने की अपील की गयी थी, ताकि सरिया में आरओबी और रेलवे फोर-लेन से संबंधित कार्य आगे बढ़ सके. याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता कल्याण राय ने अदालत को जनहित में तीन सप्ताह के भीतर मकान स्वयं हटाने की बात कही थी.

तीन सप्ता के भीतर अदालत करेगी मुआवजे पर विचार

अदालत ने रैयतों के इस निर्णय के बाद तीन सप्ताह के भीतर मुआवजा निर्धारण की प्रक्रिया पर निर्णय लेने की बात कही. रैयतों का कहना है कि उनकी बकास्त भूमि को राज्य सरकार ने गैरमजरुआ बताते हुए मुआवजा राशि सरकारी कोष में जमा कर ली थी. इसी को लेकर वे वर्ष 2021 से न्यायालय में मुआवजे और न्याय की मांग कर रहे हैं. दस्तावेजों के आधार पर जल्द मुआवजा निर्धारण के आश्वासन के बाद रैयतों ने ROB निर्माण में बाधक मकानों को स्वत: हटा लिया.

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By Laxmi narayan pa

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