ऐसे में उपभोक्ताओं को निर्बाध और पूरे वोल्टेज की बिजली मिलना लगभग असंभव हो गया है. कम वोल्टेज, बार-बार कटौती और अनियमित आपूर्ति से आम जन जीवन पूरी तरह प्रभावित हो रहा है. तेज धूप और उमस भरी गर्मी के बीच बिजली की आंखमिचौनी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. घरों में पंखे और कूलर शोपीस बनकर रह गये हैं. वहीं, छात्रों की पढ़ाई बाधित हो रही है. छोटे व्यवसाय, दुकानदार और स्वरोजगार से जुड़े लोग भी इस संकट से खासे परेशान हैं.
ग्रामीण क्षेत्र में स्थिति और गंभीर
ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी गंभीर है. गांवों में घंटो तक बिजली गायब रहती है. मांग के मुकाबले आपूर्ति बेहद कम होने से वोल्टेज पर असर पड़ता है. धनवार में भी यही स्थिति देखने को मिल रही है. अरविंद साव, उत्तम गुप्ता, राजू पांडेय, सुनीता विश्वकर्मा, लोकेश कुमार, परमानंद यादव समेत अन्य ने कहा कि इस समस्या के समाधान के लिए बिजली आवंटन बढ़ाने, स्थानीय ग्रिड की क्षमता सुधारने और लोड प्रबंधन को दुरुस्त करने की आवश्यकता है. कहा कि जब तक इन बुनियादी पहलुओं पर ध्यान नहीं दिया जायेगा, तब तक धनवार जैसे क्षेत्रों में बिजली संकट बना रहेगा.
क्या कहते हैं एई : इस संबंध में धनवार के सहायक अभियंता (एई) बिनोद कुमार ने बताया कि वर्तमान में क्षेत्र को सीमित मात्रा में ही बिजली मिल रही है. फिलहाल इसी व्यवस्था के साथ आपूर्ति जारी रहेगी.