पिता की अर्थी रुकी थी बेटे के इंतजार में, पेरोल पर घर पहुंचा जेल में बंद इकलौता बेटा; दी अंतिम विदाई

गिरिडीह में पिता की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए जेल में बंद बेटा पेरोल पर घर पहुंचा. भावुक कर देने वाली इस घटना ने पूरे गांव की आंखें नम कर दी.

गिरिडीह जिले के तिसरी प्रखंड के सलगाडीह गांव में बुधवार को ऐसा मार्मिक दृश्य सामने आया, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं. पिता की मौत हुई, लेकिन अंतिम संस्कार इसलिए रोकना पड़ा, क्योंकि उनका इकलौता बेटा जेल में बंद था.

पिता की अंतिम इच्छा थी कि बेटा ही उन्हें मुखाग्नि दे. आखिरकार प्रशासन की अनुमति के बाद बेटा पेरोल पर गांव पहुंचा और पिता को अंतिम विदाई देने की तैयारी शुरू हुई.

मंगलवार को हुआ था पिता का निधन

सलगाडीह निवासी सवना मुर्मू (पिता स्व. जटा मुर्मू) का मंगलवार को निधन हो गया था. उनका बेटा सोमाय मुर्मू उर्फ अमरदीप वर्ष 2019 से दुष्कर्म के एक मामले में जेल में सजा काट रहा है. पिता की मौत की खबर मिलने के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने उसे अंतिम संस्कार में शामिल कराने की मांग की. परिजनों ने मानवीय आधार पर पेरोल अथवा पुलिस अभिरक्षा में बेटे को गांव लाने की गुहार जिला प्रशासन से लगायी.

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पेरोल के लिए मुखिया ने की पहल

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तिसरी पंचायत के मुखिया किशोरी साव ने परिजनों के हस्ताक्षरयुक्त आवेदन को गिरिडीह जिला प्रशासन के पास भेजा. इसके बाद बुधवार की शाम सोमाय मुर्मू को पेरोल पर सलगाडीह लाया गया.

घर पहुंचा बेटा तो फूट पड़ा पूरा परिवार

लंबे समय बाद घर पहुंचे सोमाय को देखते ही मां बड़की सोरेन और पांचों बहनें सोमारी मुर्मू, सावित्री मुर्मू, हीरामणि मुर्मू, बसंती मुर्मू और काजल मुर्मू फूट-फूटकर रोने लगीं. परिजनों ने बेटे को गले लगा लिया. यह दृश्य देखकर वहां मौजूद ग्रामीणों की आंखें भी नम हो गयीं.

लंबे समय से बीमार थे सवना मुर्मू

इसके बाद परिवार ने सवना मुर्मू के अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू की. परिजनों के अनुसार आर्थिक तंगी, बेटे के जेल में रहने का दुःख और समुचित इलाज नहीं मिल पाने की परेशानी से सवना मुर्मू लंबे समय से जूझ रहे थे. मंगलवार को अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उनकी मौत हो गयी.

गांव में बना चर्चा का विषय

पिता की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए जेल की सलाखों के पीछे से बेटे का पेरोल पर घर लौटना अब पूरे गांव में चर्चा का विषय बना हुआ है. परिवार अब बेटे के हाथों पिता को मुखाग्नि देकर अंतिम विदाई देने की तैयारी में जुटा है.

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By Amardeep sinha

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