स्थायी सीओ के नहीं रहने से लोगों को काफी परेशानी हो रही है. उक्त कार्यालय का अतिरिक्त प्रभार खोरीमहुआ के दंडाधिकारी अभिषेक कुमार को सौंपा गया है. वे सप्ताह में दो-तीन दिन ही कार्यालय में उपस्थित हो पाते हैं.
जमीन विवाद का नहीं हो रहा निबटारा
प्रखंड में जमीन विवाद चरम पर है, जिसका निबटारा समय नहीं होने से टकराव की स्थिति उत्पन्न होते रहती है. विद्यार्थियों व अन्य लोगोंं को प्रमाणपत्र बनवाने में कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ता है. स्थायी सीओ के नहीं रहने से जनता दरबार भी नहीं लग रही है.एक सुपरवाइजर के सहारे चल रहा सीडीपीओ कार्यालय
कुछ ऐसी ही स्थिति बाल विकास परियोजना कार्यालय की भी है. यहां स्थायी सीडीपीओ नहीं रहने से प्रखंड में आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति खराब है. विभाग मात्र एक सुपरवाइजर के भरोसे चल रहा है. केंद्रों का निरीक्षण नहीं के बराबर हो पाता है, जिससे केंद्रों के संचालन में काफी लापरवाही बरती जा रही है.
पशुपालन विभाग में है एक चतुर्थ वर्गीय कर्मी
पशुपालन कार्यालय मात्र एक चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी के भरोसे चल रहा है. यह कार्यालय भी अतिरिक्त प्रभार में चल रहा है. यहां चिकित्सक माह में एक-दो दिन ही उपस्थित होते हैं. चिकित्सक के अभाव में मवेशियों के इलाज में काफी परेशानी होती है. प्रखंड में कृषि कार्यालय भी अतिरिक्त प्रभार में चलाया जा रहा है.
