इम्तियाज का कहना है कि वे जब तक जिंदा रहेंगे, तब-तक यह काम करते रहेंगे. बता दें कि रामनवमी के त्योहार पर कई स्थानों पर सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने का प्रयास किया जाता है. लेकिन, इम्तियाज प्रतिवर्ष रामनवमी का झंडा बनाकर बाजार में बेचते हैं. इनका कहना है कि इसी काम से इनके घर का खर्चा चलता है, तो इसे कैसे छोड़ दें.
पूर्वजों के समय से चला आ रहा यह व्यवसाय
वह बताते हैं कि महावीरी झंडा बनाने का काम उनके पूर्वजों से चला आ रहा है. उनके पिता मो. गयुश पहले झंडा बनाते थे. उनके पिता-दादा भी यही काम करते हैं. उनके वंशज में यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है. वे इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं. उन्होंने बताया कि वे रामनवमी में हर साल 10 हजार से अधिक महावीरी झंडा और बजरंग बली की पोशाक बनाकर बेचते हैं.
