यही हाल बगोदर बाजार स्थित राजकीय बुनियादी विद्यालय का है. यह विद्यालय एक समय शिक्षा के क्षेत्र में रीढ़ माना जाता था, लेकिन चहारदीवारी नहीं होने से एक ओर जहां विद्यालय के कुछ जमीन अतिक्रमण की जद में है, वहीं दूसरी ओर इस कैंपस में हर दिन शराबियों और जुआरियों का अड्डा बन जाता है. शुक्रवार को रामनवमी के कारण स्कूल बंद था. शनिवार को जब स्कूल खुला, तो विद्यालय में पहुंचने वाले बच्चों को शराब की बोतल और ग्लास मिला. बच्चों के साथ शिक्षक भी इसे हटाते देखे गये.
बगोदर थाना से दौ सौ मीटर की दूरी पर है स्कूल
यह विद्यालय बगोदर थाना से महज दो सौ मीटर की दूरी पर है. आये दिन विद्यालय में शराबियों का अड्डा होने से छात्राओं को काफी परेशानी होती है. चहारदीवारी नहीं होने से विद्यालय चारागाह बन जाता है. शिक्षक नरेश ठाकुर का कहना है कि चहारदीवारी के अभाव में स्कूल में छुट्टी के बाद यहां शराबी और जुआरी जुटते हैं. इसकी सूचना कई बार विभाग को दिया गया है, लेकिन अभी तक कोई पहल नहीं हुई है. इस समस्या पर ना तो अधिकारियों और ना ही जनप्रतिनिधियों का ध्यान नहीं है. अभिभावक स्कूल अड्डाबाजी के कारण बच्चों को भेजने में आनाकानी करते हैं. शिक्षक-शिक्षिकाओं को पढ़ाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.स्कूल की जमीन का हुआ अतिक्रमण
इतना ही नहीं विद्यालय की जमीन का भी अतिक्रमण लगातार जारी है. इससे यह पता ही नहीं चल पाता है कि स्कूल कहां है. जबकि, यह विद्यालय जीटी रोड से सटा हुआ है. इसी कैंपस के बगल में महिला प्राथमिक शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय (डायट) है. जिसकी अपनी चहारदीवारी है और वह सुरक्षित है. लेकिन, इस स्कूल पर किसी का ध्यान नहीं है. शिक्षकों ने तत्काल विद्यालय में चहारदीवारी बनाने की मांग की, ताकि इसके अस्तित्व को बचाया जा सके.
