Giridih News :होलिका दहन आज, होली चार को : सव्यसाची
सनातन धर्मावलंबियों के लिए होली एक महापर्व है, जो प्रत्येक वर्ष फाल्गुन पूर्णिमा तथा चैत्र कृष्ण पक्ष प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है. फाल्गुन पूर्णिमा तिथि को लोग होलिका दहन करते हैं, जिसे बुराई पर अच्छाई की जीत, वसंत ऋतु के आगमन का सूचक तथा प्रेम और सद्भावना के प्रतीक माना जाता है. इस बार होलिका दहन दो मार्च को होगा. होली चार को होगी.
By PRADEEP KUMAR | Updated at :
यह त्योहार हमें सामाजिक दूरियों को मिटाने, नयी ऊर्जा का संचार करने, आपसी प्रेम को बढ़ावा देने, पुरानी कड़वाहट को भूलकर गले मिलने का संदेश देता है. इस वर्ष होलिका दहन को लेकर लोगों में पहले से ही असमंजस की स्थिति बनी हुई है. कहीं दो मार्च की रात, तो कहीं तीन मार्च को होलिका दहन की चर्चा हो रही है.
तीन मार्च को चंद्रग्रहण के कारण यह स्थिति :
आरपीएफ पंच मंदिर के पुजारी सव्यसाची पांडेय ने बताया कि यह स्थिति तीन मार्च को लगने वाला चंद्रग्रहण के कारण उत्पन्न हुआ है. उन्होंने बताया कि स्थानीय लोग ऋषिकेश पंचांग के अनुकूल त्योहारों को मानते रहे हैं. हृषिकेश पंचांग में इस बार दो मार्च व्रत की पूर्णिमा शाम 5:18 से हो रही है, जो पूरी रात और अगले दिन शाम 4:30 तक रहेगी. अरुणोदय पूर्व भद्रा रहित पूर्णिमा तिथि में रात्रि शेष 4: 56 मिनट भद्रा बाद होलीका दहन (तीन मार्च की सुबह) होगा. बताया कि शास्त्रों के अनुसार भद्रा को अशुभ योग माना गया है. मान्यता है कि सूर्य देव की पुत्री तथा शनि देव की बहन भद्रा में किये गये शुभ कार्यों का फल उल्टा हो सकता है. जबकि स्नान दान की पूर्णिमा तीन मार्च तथा सर्वत्र होली चार मार्च बुधवार को मनायी जायेगी.
नकारात्मक ऊर्जा को होता है नाश
सव्यसाची ने कहा कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उपयुक्त समय में होलिका दहन करने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और घर परिवार में सुख-शांति बनी रहती है. होलिका दहन के समय भय व कर्ज से मुक्ति पाने के लिए नरसिंह स्रोत का पाठ करना चाहिए. होलिका दहन के बाद जलती अग्नि में सूखा नारियल जलाने से नौकरी की बाधायें दूर होती है. लगातार बीमारी से परेशान लोगों के सोने के स्थान पर होली का दहन के स्थल की राख को छिट देने से बीमारी दूर होती है. वहीं, गृह क्लेश से मुक्ति पाने और सुख समृद्धि के लिए होलिका की अग्नि में जौ-आटा का अर्पण करना चाहिए. जबकि, चंद्र ग्रहण के बारे में उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 का पहला चंद्रग्रहण तीन मार्च को होगा. यह देश में ग्रस्तोदित खंड चंद्रग्रहण के रूप में दृश्य होगा. चंद्रोदय के समय केवल इसका मोक्ष दृश्य होगा. भारतीय समयानुसार खंड ग्रास चंद्र ग्रहण का प्रारंभ घ 16 मि 34, जबकि इसका मोक्ष घ 17 मि 33 पर होगा. इसकी कुल अवधि एक घंटा 19 मिनट की होगी. चंद्र ग्रहण आरंभ होने के नौ घंटे पूर्व सूतक प्रारंभ हो जाता है. सूतक काल प्रारंभ होने से लेकर ग्रहण के मोक्ष प्राप्ति होने तक लोगों को अपने नियम संयम में रहना चाहिए. खासकर गर्भवती स्त्रियों को ग्रहण काल में घर के अंदर रहना चाहिए. देवालयों में दर्शनादि कार्य को वर्जित बताया. श्री पांडेय ने विभिन्न राशि वालों के लिए ग्रहण कल के समय चंद्र ग्रहण देखने का फलाफल भी बताया. मेष-चिंता, वृष-व्यथा, मिथुन-श्री, कर्क-क्षति, सिंह-घात, कन्या-हानि, तुला-लाभ, वृश्चिक-सुख, धनु-मान नाश, मकर-मृत्यु तुल्य कष्ट, कुंभ- स्त्री पीड़ा, मीन-सौख्यम्. लोगों को अपनी राशि के अनुसार इनका लाभ लेना चाहिए.