साथ ही गरहाटांड़ व बैरिया गांव में अस्थायी पौधशाला बनाया गया है. यहां कटहल, जामुन, कचनार, अमलतास, जंगल जलेबी, महोगनी, शीशम, सागवान, आंवला, करंज, कदम, गूलर, शेमल, करम, शहतूत, शिरिष, मौलश्री, बांस समेत अन्य प्रजाति के लगभग नौ लाख से भी अधिक पौधे तैयार हो गये हैं.
मॉनसून शुरू होते ही होगा पौधरोपण
मॉनसून शुरू होते ही पौधरोपण शुरू किया जायेगा. जानकारी के मुताबिक गरहाटांड़ में 138 हेक्टेयर भूमि पर 2.32 लाख, बैरिया में 145 हेक्टेयर भूमि पर 2.42 लाख, गिद्धासिमर में 62 हेक्टेयर भूमि पर 1.08 लाख, भंडराटांड़ में 55 हेक्टेयर भूमि पर 60500, लाहीबारी में 75 हेक्टेयर भूमि पर 15 हजार, जगई गांव में 27 हेक्टेयर भूमि पर 29 हजार, नवादा में नौ हेक्टेयर भूमि पर 10 हजार तथा घसकरीडीह में पांच हेक्टेयर भूमि पर 5500 पौधे लगाये जाएंगे.
पचपहरी में लगाये जायेंगे बांस के पौधे
प्रखंड के पचपहरी गांव की 20 हेक्टेयर भूमि पर पौधरोपण किया जायेगा. यहां चिह्नित भूमि पर बांस के पौधे लगाये जायेंगे. इस वर्ष सिर्फ पचपहरी गांव में ही बांस के पौधे को लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. इस संबंध में वनपाल नीरज कुमार पांडेय ने बताया कि पौधरोपण को लेकर पीट खुदाई व पौधा तैयार करने का कार्य पूरा कर लिया गया है. मॉनसून शुरू होते ही पौधरोपण शुरू कर दिया जायेगा.
