Giridih News :गिरिडीह में पांच आरा मिलों को लाइसेंस, जबकि चल रहीं तीन दर्जन से अधिक

जिले भर में बड़े पैमाने पर अवैध आरा मिलों का संचालन किया जा रहा है. विभागीय सूत्रों के अनुसार गिरिडीह जिले में सिर्फ पांच आरा मिल को ही लाइसेंस प्राप्त है, जबकि तीन दर्जन से भी ज्यादा आरा मिलों का संचालन विभिन्न प्रखंडों में किया जा रहा है. जानकारी के मुताबिक गिरिडीह नगर निगम क्षेत्र में ही सभी पांच आरा मिल संचालित हैं. इनमें से मात्र तीन आरा मिल ही अभी संचालित हैं.

बताया जाता है कि जिले के गिरिडीह मुफस्सिल क्षेत्र, बेंगाबाद, गांडेय, बिरनी, जमुआ, बगोदर, देवरी, धनवार और पीरटांड़ के इलाके में अवैध आरा मिलों में जंगल की लकड़ियों की धड़ल्ले से चिराई हो रही है और उसे दूर-दराज के इलाके में खपाया जा रहा है. आरा मिल के कई संचालक खुद ही लकड़ियों की सामग्री तैयार करते हैं और जिला व जिले से बाहर तक भेजते हैं. हालांकि समय-समय पर वन विभाग भी लकड़ी के अवैध कारोबार के खिलाफ अभियान चलाया गया है. विभागीय कार्रवाई का कोई खौफ इन आरा मिलों के संचालकों को नहीं है. तू डाल-डाल, मैं पात-पात कहावत की तर्ज पर अवैध कारोबारी जगह बदल-बदलकर अपना धंधा जारी रखते हैं. गिरिडीह जिला मुख्यालय से सटे गिरिडीह मुफस्सिल क्षेत्र के बंदरकुप्पी, परसाटांड़, हिरणपुर के अलावे पीरटांड़ के अंगईया, घंघराबारी व कुंडको, धनवार प्रखंड के घोड़थंभा, बुधवाडीह, गोदगो आदि इलाके में भी अवैध आरा मिल संचालित हैं.

छापेमारी के बाद पुन: बेखौफ जारी है कारोबार

जानकारी के अनुसार कई प्रखंडों में गत छह माह के दौरान वन विभाग ने छापेमारी कर भारी मात्रा में लकड़ियों के साथ आरा मिलों के उपकरण आदि बरामद किया था. बावजूद इसके इन इलाकों में फिर से यह धंधा शुरू कर दिया गया है. विदित हो कि पिछले 26 फरवरी को ही गांडेय के अहिल्यापुर थानांतर्गत बेलाटांड़ में वन विभाग ने छापेमारी की थी. इस छापेमारी में अवैध लकड़ियों के साथ चार ट्रैक्टर, तीन बाइक और लकड़ी, मशीन आदि सामान बरामद हुए थे. गिरिडीह के अलगुंदा व शाखाबारा के साथ-साथ बगोदर के कुछ इलाकों में छापेमारी कर लकड़ियां व मिल के उपकरण आदि जब्त किये गये थे, जबकि बगोदर के कुदर जंगल से लकड़ियों से लदे दो ट्रैक्टर भी पकड़े गये थे.

लकड़ियों के अवैध कारोबार पर फिर होगी कार्रवाई : डीएफओ

डीएफओ मनीष तिवारी ने कहा कि सूचनाएं मिलने पर समय-समय पर अवैध आरा मिलों पर कार्रवाई की गयी है. छापेमारी में कई बार बड़ी सफलता भी मिली है. कहा कि इस बार भी कई स्थानों से अवैध आरा मिलों के संचालन को लेकर सूचनाएं मिल रही हैं. बहुत जल्द इन अवैध आरा मिलों के विरुद्ध कार्रवाई की जायेगी. उन्होंने कहा कि लकड़ियों के अवैध कारोबार को रोकने के लिए फिर से बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया जायेगा.

सीमावर्ती इलाके में खुलेआम चल रहे अवैध आरा मिल

पुलिस प्रशासन व वन विभाग से बचने के लिए कई धंधेबाज सीमावर्ती इलाके में अवैध कारोबार चला रहे हैं. इसका प्रत्यक्ष उदाहरण प्रखंड के सीमावर्ती क्षेत्र में संचालित अवैध आरा मिल है. जानकारी के अनुसार प्रखंडों के कई इलाके में खुलेआम अवैध आरा मिल संचालित रहे हैं, पर दूसरे प्रखंड या थाना की सीमा पर होने के कारण पुलिस प्रशासन की नजर नहीं पड़ रही है.

गांडेय के भंडारीडीह, बनशुंभी, भदवा में संचालित हैं मिल :

गांडेय प्रखंड की झरघट्टा पंचायत से सटे भंडारीडीह (गिरिडीह मधुपुर रेलखंड) के दूसरे छोर (बेंगाबाद प्रखंड) पर खुलेआम अवैध आरा मिल संचालित हो रही है. गांडेय व मार्गोमुंडा थाना क्षेत्र की सीमा पर बनशुंभी में भी अवैध आरा मिल का संचालन हो रहा है. इसके अलावे प्रखंड क्षेत्र के अन्य सीमावर्ती क्षेत्र यथा भदवा, दारवे आदि इलाके में भी खुलेआम अवैध आरा मिल का संचालन हो रहा है और कारोबारी मालामाल हो रहे हैं.

बेंगाबाद में एक दर्जन से ज्यादा अवैध आरा मिल

बेंगाबाद थानांतर्गत विभिन्न गांवों में धड़ल्ले से आरा मिल संचालित हो रहे हैं. अवैध रूप से संचालित इन आरा मिलों में प्रतिदिन लाखों का कारोबार किया जा रहा है. बिना लाइसेंस के फर्जी तरीके से संचालित अवैध आरा मिलों की रोकथाम की दिशा में विभागीय निष्क्रियता से आरा मिल संचालक उत्साहित हैं. कुछ ऐसे भी आरा मिल हैं जहां बड़ी-बड़ी मशीन लगाकर लकड़ी की चिराई का काम हो रहा है. क्षेत्र से प्रतिदिन लकड़ी काटकर आरा मिल पहुंचायी जाती हैं. धंधेबाज दिन-रात उसकी चिराई कर बेच रहे हैं.

इन स्थानों पर संचालित हैं अवैध आरा मिल

बताया जाता है कि बेंगाबाद के मोतीलेदा, तेलोनारी, गेनरो, जरूआडीह, बदवारा सहित अन्य पंचायतों के गांवों में एक दर्जन से अधिक आरा मिल संचालित हैं. इन आरा मिलों के खिलाफ अबतक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. मोतीलेदा की मिल में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में लकड़ियों को लेकर धंधेबाज पहुंचते हैं. तेलोनारी के मधुबन, परसन में भी व्यापक पैमाने पर लकड़ियों का कारोबार हो रहा है. ये आरा मिल ऐसे स्थान पर संचालित हैं, जहां पहुंचने में विभागीय टीम को खासी मशक्कत करनी पड़ती है.

लंबे अरसे से नहीं हुई है कार्रवाई

विदित हो कि पूर्व डीएफओ प्रवेश अग्रवाल के कार्यकाल में बेंगाबाद के दामोदरडीह, चोरकट्टा, चकरदाहा गांवों में अवैध आरा मिलों के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है. विभागीय सक्रियता से लंबे समय तक अवैध मिलों का संचालन बंद हो गया था, पर हाल के दिनों में लंबे समय से कार्रवाई नहीं होने से पुनः धड़ल्ले से आरा मिलों का संचालन शुरू हो गया है. प्रभारी वनपाल रोहित कुमार का कहना है कि अवैध आरा मिलों के संचालन की सूचना नहीं है. शीघ्र छानबीन कर कार्रवाई की जायेगी.

जमुआ में बेखौफ चल रही हैं अवैध आरा मिलें

जमुआ प्रखंड में इन दिनों अवैध आरा मिलों का कारोबार चरम पर है. जमुआ के विभिन्न क्षेत्रों में दर्जनों आरा मिल बिना किसी वैध कागजात के धड़ल्ले से चल रही हैं. इन मिलों में न केवल स्थानीय पेड़ों की कटाई हो रही है, बल्कि जंगलों से लाये गये कीमती सखुआ और महुआ के बोटा (लट्ठे) रात के अंधेरे में खपाये जा रहे हैं. युकलिप्टस पेड़ की कटाई धड़ल्ले से की जा रही है. इसे देखने वाले कोई नहीं है. 2018 के बाद से किसी भी बड़ी मिल को न तो सील किया गया और न ही भारी जुर्माना वसूला गया, जिससे संचालकों में कानून का डर खत्म हो चुका है. जमुआ में इन दिनों मिर्जागंज, अंधरकोला, प्रमाणिकडीह, कारोडीह (डोमाटांड़ ) खरगडीहा, गनियाडीह आदि स्थान पर आरा मिल संचालित हैं. ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र के जंगलों का दायरा लगातार सिमट रहा है.

बिरनी में धड़ल्ले से हो रहा है आरा मिल का संचालन

पर्यावरण संरक्षण के लिए बिरनी प्रखंड की सभी पंचायतों में सरकार की ओर से वन उप परिसर पदाधिकारी नियुक्त किये गये हैं ताकि पर्यावरण को बचाया जा सके. लेकिन इलाके में इसका कोई खास असर नहीं दिख रहा. बिरनी में एक भफी लाइसेंस प्राप्त आरा मिल नहीं है. सभी को घर के काम के लिए लकड़ी की जरूरत पड़ती है. ऐसे में लाइसेंसी आरा मिल नहीं होने का लाभ अवैध आरा मिल संचालक उठा रहे हैं और वन विभाग से भयभीत कर लकड़ी खरीदने से लेकर लकड़ी चिराने तक लोगों से मोटी रकम वसूली कर रहे हैं.

लाइसेंस मिलने से सरकार और लोगों को भी होगा लाभ

विदित हो कि अकेसिया की लकड़ी जंगलों से या फिर किसानों से आसानी से उपलब्ध हो जाती है. यह लकड़ी फर्नीचर के कामों के लिए सबसे उपयुक्त होती है. इसकी पतली डाल भी उपयोगी होती है. दरवाजा पलंग से लेकर अन्य कामों में इसका उपयोग होता है. आरा मिल का संचालन बिरनी प्रखंड के सुइयाडीह, लंगुरडीहा, गुड्डीटांड़, कर्री, कटरियाटांड़, चिताखारो, द्वारपहरी, बराय, मरगोड़ा, बाघानल, हरिहरपुर आदि जगहों में धड़ल्ले से की जा रही है. प्रखंड के लोगों का कहना है कि सरकार आरा मिल के लिए लाइसेंस दे देती तो लोगों को तय राशि से ज्यादा का भुगतान नहीं करना पड़ता. लोगो ने बताया कि जहां-जहां छापेमारी हुई है, पुनः वहीं या वहां से कुछ हटकर आरा मिलों का संचालन हो रहा है. उप वन परिसर पदाधिकारी योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि नये रेंजर ने पदभार ग्रहण कर लिया है. शीघ्र ही कार्रवाई की जायेगी.

बगोदर में भी चल रहे बिना लाइसेंस के कई आरा मिल

बगोदर वन प्रक्षेत्र इलाके में अवैध आरा मीलों का संचालन धड़ल्ले से हो रहा है. समय-समय पर छापेमारी में अवैध धारा मिलों से लकड़ियां भी जब्त होती हैं. बगोदर प्रखंड के अटका, मुंडरों, कुदर, धरगुल्ली, खेतको में कई बार कार्रवाई भी की गयी. बावजूद इसके चोरी-छिपे अटका में तीन-चार जगहों पर अवैध आरा मिल संचालित हैं. दूसरी ओर जंगलों से चोरी-छिपे पेड़ों की कटाई कर उसे आरा मिलों में सप्लाई भी किया जा रहा है. आठ दिन पूर्व कुदर से ही वन विभाग ने दो ट्रैक्टर कटी हुई करीब एक लाख रु की लकड़ी जब्त की थी. इससे जंगल की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. प्रभारी फॉरेस्टर डिलो दास ने कहा कि ऐसी सूचना है तो छापेमारी की जायेगी.

देवरी में भी चल रहा धंधा

देवरी अंचल अंतर्गत परसा, मानिकबाद, गोरटोली व बंगारो गांव में बेरोकटोक आरा मिल संचालित हैं. मानिकबाद में दो आरा मिल संचालित हैं. जानकारी के मुताबिक इन गांवों में संचालित आरा मिलों में ग्रामीण इलाके से खरीदे पेड़ों के साथ-साथ जंगल से कटाई कर लायी गयी लकड़ी की चिराई कर ऊंची कीमत पर बेची जा रही है. इन आरा मिलों की वजह से देवरी के पश्चिमी क्षेत्र के जंगलों में तेजी से पेड़ों की संख्या घट रही है.

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By PRADEEP KUMAR

PRADEEP KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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