Giridih News :रहमतों वाला है माहे रमजान का हर एक लम्हा

Giridih News :रमजानुल मुबारक महीने का हर एक लम्हा रहमतों वाला है. सबसे बड़ी बात यह है कि इस महीने में कुरआन पाक नाजिल हुआ. उक्त बातें मौलाना कमरुद्दीन निजामी ने कहीं.

माहे रमजान की फजीलत पर चर्चा करते हुए मौलाना कमरुद्दीन निजामी ने बताया कि अल्लाह ने फरमाया है कि माहे रमजान में रोजा का मतलब गरीबी और तंगदस्ती में मुब्तला और भूख-प्यास से बिलखते इंसानों के दर्द व गम का एहसास, दिल व दिमाग में जरूरतमंद मुसलमानों की मदद का जज्बा-ए-सादिक पैदा हो जाये. मुसलमान रमजान की इबादत की बदौलत अपने आप को पहले से ज्यादा अल्लाह त आला के करीब महसूस करता है, ताकि मुसलमान सालभर अल्लाह त आला से डरते हुए जिंदगी गुजारे. जिक्र व फिक्र, इबादत व रियाजत, कुरआन की तिलावत और याद-ए- इलाही में खुद को व्यस्त रखे. कहा कि रमजान वह महीना है, जिसका अव्वल हिस्सा (असरा) रहमत, बीच का हिस्सा (असरा) मगफिरत और आखिरी हिस्सा (असरा) निजात यानी जहन्नुम से आजादी का है. बताया कि रमजान शरीफ का रोजा दस शव्वाल दो हिजरी में फर्ज हुआ. सबसे पहले यौमे आशूरा का रोजा फर्ज हुआ था. बताया कि रमजान एक ऐसा महीना है, जिसमें हर दिन और हर वक्त इबादत होती है. माहे रमजान में रोजा, नमाज, सेहरी, इफ्तार, तरावीह की नमाज का जज्बा होता है. कहा कि रमजान में शैतानों को जंजीरों में जकड़ दिया जाता है और जन्नत के दरवाजे खोल दिये जाते हैं, जिनमें से अल्लाह त आला की खास रहमतें जमीन पर उतरती हैं.

चांद दिखा, रमजानुल मुबारक महीने का पहला रोजा आज

बुधवार की शाम चांद दिखने के साथ ही रमजानुल मुबारक महीना शुरू हो गया. मुस्लिम समुदाय के लोग सेहरी-इफ्तार व नमाज को ले उत्साहित हैं. घर से मस्जिद तक तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. कई मस्जिदों में तरावीह की नमाज भी शुरू हुई. इधर, बाजार में भी सेहरी व इफ्तार से जुड़ी सामग्री यथा खजूर, तरबूज, सेव,अंगूर, केला, खीरा, अनार समेत दूध-दही, ब्रेड आदि की बिक्री बढ़ गयी है.

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Published by: Pradeep kumar

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