संध्या आरती को लेकर विशेष उत्साह दिख रहा है. बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिरों में पहुंच कर आरती में भाग ले रहे हैं. प्रखंड के इसरी बाजार, लोहेडीह, जामतारा, बासोकांडो व चंदनाडीह में दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर पूजा हो रही है. सभी स्थानों पर भव्य पंडाल व आकर्षक विद्युत सज्जा की गयी है.
इसरी बाजार में 1940 के दशक से हो रही पूजा
इसरी बाजार में चैती दुर्गा पूजा की शुरुआत 1940 के दशक में हुई थी और तब से यह परंपरा लगातार चली आ रही है. हटियाटांड़ में स्थापित दुर्गा प्रतिमा के साथ-साथ मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों को रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया है. यहां मेला भी लगता है. जामतारा पंचायत के डुमरी मोड़ में भी भव्य रूप से पूजा हो रही है.बासोकांडों, चंदनाडीह व लोहेडीह में उमड़ रहे श्रद्धालु
वहीं, बड़की बेरगी पंचायत के बासोकांडों में दो वर्ष से पूजा की जा रही है. यहां समोद महतो ने इस पूजा की शुरुआत की थी. दशरथ मंडल के अनुसार संतान प्राप्ति की मनोकामना पूरी होने के बाद समोद ने दुर्गा पूजा प्रारंभ की थी. जरीडीह पंचायत के चंदनाडीह में भी लगभग 40 वर्षों से चैती दुर्गा पूजा की जा रही है. यहां नीलकंठ सिंह ने मनोकामना पूरी होने के बाद इस पूजा की शुरुआत की थी. लोहेडीह में चैती दुर्गा पूजा का इतिहास काफी पुराना है. ग्रामीणों के अनुसार यहां वर्ष 1908 से 1911 के बीच बुधन सिंह ने निजी तौर पर पूजा की शुरुआत की थी. कहा जाता है कि एक वर्ष आर्थिक तंगी के कारण पूजा नहीं हुई, तो गांव में महामारी फैल गयी. तब एक परिवार ने पूजा को पुनः शुरू करने का संकल्प लिया. इसके बाद ग्रामीणों ने मिलकर इसे सार्वजनिक रूप से आयोजित करना शुरू किया. तीनों जगहों पर श्रद्धालु उमड़ रहे हैं.
