भवन निर्माण कार्य बंद होने से स्थानीय लोग मायूस हो गये थे. दो वर्ष बाद वन विभाग ने परतमाधाम मंदिर के नाम पर एनओसी दे दिया. इसके बाद संवेदक ने काम शुरू कर दिया. काम शुरू होने से स्थानीय लोगों में खुशी है.
जंगल के बीच है मंदिर
बता दें कि परतमाधाम एक प्राचीन मंदिर है, जो बराकर नदी व सैकड़ों एकड़ में लगे सखुआ पेड़ के घने जंगल के बीच है. यह स्थल काफी मनमोहक है. प्रत्येक वर्ष महाशिवरात्रि के अवसर पर समिति यहां मेला लगवायी है. साथ ही प्रत्येक सोमवार व अन्य दिन भगवान भोले को जल चढ़ाने के लिए भक्त आते हैं. वर्ष में कई जोड़ों की शादी भी यहां होती है. लोगों की समस्या को देखते हुए बगोदर के तत्कालीन विधायक विनोद कुमार सिंह के प्रयास से उक्त योजना को धरातल पर लाया गया. इसका शिलान्यास 13 जनवरी 2024 को किया गया. मंदिर प्रबंधन की अपनी जमीन नहीं रहने के कारण संवेदक ने स्थानीय लोगों के सहयोग से वन विभाग से बगैर एनओसी लिए विभाग की जमीन पर काम शुरू कर दिया. इसे देखते हुए वन विभाग ने काम पर रोक लगा दिया. इस बीच स्थानीय जनप्रतिनिधियों व लोगों के साथ वन विभाग के अधिकारी का विवाद हो गया. विभाग ने स्थानीय मुखिया सहदेव यादव समेत अन्य लोगों के विरुद्ध वन अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज करायी थी.
क्या कहते हैं ग्रामीण
ग्रामीण बैजनाथ यादव, बसंत यादव, सत्यदेव यादव, बिनोद यादव समेत अन्य का कहना है कि परतमाधाम मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र है. 10-15 किमी के क्षेत्र के लोग यहां जलाभिषेक करने आते हैं. यहां विवाह भवन का निर्माण जरूरी है. भवन की स्वीकृति मिली, लेकिन संवेदक ने वन विभाग से बिना एनओसी लिए काम शुरू कर दिया. अब विभाग से एनओसी मिलने के बाद संवेदक ने काम करना शुरू कर दिया है. भवन बनने के बाद लोगों को काफी सहूलियत होगी.
क्या कहते हैं मुखिया
मुखिया सहदेव यादव ने कहा कि पूर्व विधायक विनोद कुमार सिंह ने भवन निर्माण को लेकर काफी प्रयास किया. डीएफओ से मिलकर जनहित में एनओसी देने की बात कही. इसके बाद काम शुरू हुआ.
