छोटकी खरगडीहा-बनहती मुख्य मार्ग स्थित परसन नदी पुल की स्थिति लगातार जर्जर होती जा रही है. पुल के करीब आधा दर्जन से अधिक पिलरों के क्षतिग्रस्त होने और फाउंडेशन टूट जाने से किसी बड़े हादसे की आशंका गहरा गयी है. स्थानीय ग्रामीणों ने विभागीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराते हुए शीघ्र मरम्मत और सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने की मांग की है.
डेढ़ दशक पुराना पुल, हजारों लोगों की आवाजाही का प्रमुख मार्ग
जानकारी के अनुसार परसन नदी पर करीब डेढ़ दशक पूर्व तत्कालीन सांसद तिलकधारी प्रसाद सिंह की पहल पर पुल का निर्माण कराया गया था. इस पुल के माध्यम से तेलोनारी, ताराटांड़, ओझाडीह, छोटकी खरगडीहा समेत आधा दर्जन से अधिक पंचायतों के लोग गिरिडीह शहर आते-जाते हैं. छोटकी खरगडीहा से बनहती तक पक्की सड़क बनने के बाद इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही भी काफी बढ़ गयी है.
बालू उठाव और कटाव से कमजोर हुआ पुल का आधार
ग्रामीणों का आरोप है कि नदी से लगातार बालू उठाव और बारिश के दौरान तेज जल प्रवाह के कारण पुल के नीचे की जमीन गहरी होती चली गयी. इससे पिलरों के नीचे बने सपोर्टिंग फ्लोर और फाउंडेशन को भारी नुकसान पहुंचा है. कई स्थानों पर फाउंडेशन पूरी तरह टूट चुका है, जबकि करीब सात पिलरों में क्षति और झुकाव के संकेत दिखाई दे रहे हैं. पुल के विभिन्न हिस्सों में दरारें और टूट-फूट भी नजर आने लगी है.
जान जोखिम में डालकर आवागमन कर रहे लोग
पुल की जर्जर स्थिति के बावजूद लोग मजबूरी में इसी मार्ग से आवागमन कर रहे हैं. ग्रामीणों के अनुसार दो दिन पूर्व एक तेज रफ्तार बाइक चालक पुल पार करने के दौरान अनियंत्रित होकर नदी में जा गिरा था. स्थानीय लोगों की तत्परता से उसकी जान बच गयी, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था. ग्रामीणों का कहना है कि पुल के नीचे करीब 20 फीट से अधिक गहरी खाई बन चुकी है, जो लगातार बढ़ रही है.
तत्काल कार्रवाई नहीं हुई तो बढ़ सकता है खतरा
स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते पुल की तकनीकी जांच और मरम्मत नहीं करायी गयी, तो बारिश और बाढ़ के दौरान स्थिति गंभीर हो सकती है. इससे न केवल जान-माल का नुकसान होगा, बल्कि क्षेत्र के हजारों लोगों का संपर्क भी प्रभावित हो सकता है. ग्रामीणों ने प्रशासन से अविलंब विशेषज्ञों की टीम भेजकर पुल की जांच कराने और सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने की मांग की है.
