भंवरडीह निवासी हुबलाल पांडेय ने वासंतिक नवरात्र के दौरान माता दुर्गा से संतान की कामना की थी. मनोकामना पूर्ण होने के बाद उन्होंने वैष्णव पद्धति से पूजा शुरू की. यहां आज भी पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से परंपरा निभायी जा रही है. यहां माता दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा होती है. खास बात यह है कि पुजारी और साधक दोनों परम वैष्णव होते हैं. रात्रि में भजन-कीर्तन होता है.
बिहार से पूजा करने आते हैं श्रद्धालु
इस दौरान पूरा गांव भक्तिमय माहौल में डूबा रहता है. महाअष्टमी को भगवती की विशेष पूजा में सबसे अधिक श्रद्धालु पहुंचते हैं. पूजा के दौरान ना सिर्फ बेंगाबाद, बल्कि आसपास के इलाकों और बिहार के कई गांवों से भी श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. नवरात्र समाप्ति के बाद मेला भी लगता है. आयोजन को सफल बनाने में महेंद्र पांडेय समेत ग्रामीण सक्रिय हैं.
