इसके बाद नायके बाबा को पूजा स्थल से गांव लाया गया. यहां गांव की कन्याओं ने नायके बाबा के पैर धोकर स्वागत किया. नायके बाबा ने उन्हें सखुआ और महुआ का फूल उपहार में दिया. लड़कियों ने फूल अपने कान तथा बाल में लगाये. मुख्य अतिथि नुनूराम किस्कू ने कहा कि आदिवासी समाज प्रकृति की पूजा के साथ-साथ उसकी सुरक्षा पीढ़ियों से करते आ रही है.
भाषा, संस्कृति, सभ्यता व परंपरा संरक्षित रखने की अपील
उन्होंने लोगों से अपनी भाषा, संस्कृति, सभ्यता और परंपरा को संरक्षित करने की अपील की. इस दौरान गीत संगीत के माध्यम से प्रकृति को प्रसन्न किया गया. कहा पेड़ों में नये पत्ते व फूल देखकर समाज खुशी में यह पर्व मनाता है. मौके पर पूर्व मुखिया सुरेंद्र सोरेन, बिंदुलाल मरांडी, बाबूजन मुर्मू, रभन मुर्मू, शिवचरण मुर्मू, थोमस मरांडी, श्रीलाल टुडू, रामकिशोर मंडल, सुखु टुडू सहित अन्य मौजूद थे.
