इसमें समानतामूलक उच्च शिक्षा, भारतीय ज्ञान परंपरा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के एकीकरण पर चर्चा हुई. समापन दिवस के प्रथम व द्वितीय तकनीकी सत्रों के मुख्य वक्ता प्रो आशीष श्रीवास्तव रहे. उन्होंने सुशासन, नेतृत्व, संस्थागत योजना निर्माण तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका पर प्रकाश डाला. कहा कि एआई कोई विकल्प नहीं बल्कि एक सहायक उपकरण है, जिसका विवेकपूर्ण उपयोग शिक्षण व प्रशासन को सशक्त बना सकता है. समापन सत्र में पीएम-उषा नोडल पदाधिकारी व कार्यक्रम संयोजक डॉ अरुण कुमार मिश्रा विशेष रूप से उपस्थित रहे. उन्होंने प्रतिभागियों, संसाधन व्यक्तियों और आयोजन समिति के सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया.
भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक तकनीक के संतुलित उपयोग पर जोर
मुख्य अतिथि आरके महिला कॉलेज की पूर्व प्राचार्य डॉ पुष्पा सिन्हा ने शिक्षकों से भारतीय ज्ञान परंपरा व आधुनिक तकनीक के संतुलित उपयोग के माध्यम से विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में कार्य करने का आह्वान किया. विशिष्ट अतिथि ऑनलाइन जुड़े आइयूसीटीई, बीएचयू वाराणसी के निदेशक प्रो प्रेम नारायण सिंह ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का समन्वय उच्च शिक्षा को अधिक समावेशी और भविष्य उन्मुख बनायेगा.
कार्यक्रम की सफलता पर दी बधाई
कार्यक्रम के संरक्षक एवं विनोबा भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग के कुलपति प्रो चंद्रभूषण शर्मा ने सात दिनों तक चले कार्यक्रम की सफलता पर सभी को बधाई दी. प्रतिभागी आदर्श कॉलेज राजधनवार के डॉ मिथिलेश महथा व डॉ कृष्ण कुमार ने कार्यक्रम के प्रमुख निष्कर्षों की प्रस्तुति दी. कार्यक्रम का संचालन डॉ बलभद्र सिंह व धन्यवाद ज्ञापन कॉलेज के प्राचार्य डॉ मृगेंद्र नारायण सिंह ने किया. कार्यक्रम में गिरिडीह कॉलेज, आदर्श कॉलेज राजधनवार, एलबी कॉलेज सहित जिले के विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों ने सक्रिय सहभागिता निभायी.
