किसी ने इसे गिरिडीह हवाई अड्डा के रनवे विस्तार से जोड़कर देखा, तो कुछ लोगों ने युद्ध और सुरक्षा तैयारियों से इसका संबंध बताया. सोशल मीडिया और चौक-चौराहों पर चर्चाओं का बाजार गर्म रहा. हालांकि, जांच में सामने आया कि यह हेलीकॉप्टर किसी सैन्य या सुरक्षा अभियान के लिए नहीं, बल्कि तकनीकी सर्वेक्षण के लिए उड़ान भर रहा था. दरअसल हेलीकॉप्टर के माध्यम से जीपीएस-जीएनएसएस सर्वे किया जा रहा है. यह सर्वे उन स्थानों को चिह्नित करने और उनका तकनीकी आकलन करने के लिए किया जाता है, जहां आवश्यकता पड़ने पर हेलिपैड का निर्माण किया जा सके. सर्वे विशेष रूप से आपातकालीन परिस्थितियों, आपदा प्रबंधन, वीआइपी या बड़े नेताओं के आगमन तथा बड़े सरकारी या सार्वजनिक कार्यक्रमों के आयोजन को ध्यान में रखकर कराया जा रहा है. संभावित स्थलों की भौगोलिक स्थिति, समतलता, आसपास की बाधा और सुरक्षा मानकों का आकलन किया जाता है. प्रशासनिक स्तर पर यह पहल भविष्य की जरूरतों को देखते हुए की जा रही है वहीं, सच्चाई सामने आने के बाद शहरवासियों ने भी राहत की सांस ली है. इसके बाद हेलीकॉप्टर की उड़ान को लेकर फैली अफवाहों पर विराम लग गया है.
हेलीपैड सर्वे के लिए हो रही है उड़ान : डीसी
डीसी रामनिवास यादव ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि यह कोई असामान्य या सुरक्षा से जुड़ी गतिविधि नहीं है. हेलीकॉप्टर जीपीएस-जीएनएसएस सर्वे के लिए लगाया गया है. बताया कि यह सर्वे बोकारो से आयी तकनीकी टीम कर रही है. गिरिडीह में किन किन स्थानों पर चौपर के लिए हेलीपैड बनाने का सर्वे किया जा रहा है.
संवाददाता विष्णु स्वर्णकार