Giridih News :एलपीजी गैस आपूर्ति में 20 प्रतिशत की कटौती, जिले कई इलाकों में किल्लत

Giridih News :जिले में एलपीजी गैस की किल्लत हो गयी है. फलस्वरूप पूर्व की तरह डोर टू डोर गैस की आपूर्ति कई एजेंसियों ने बंद कर दी है. स्थिति यह है कि कई गैस एजेंसियों के दुकानों के पास गैस लेने के लिए उपभोक्ताओं को लंबी कतार में खड़ा होना पड़ रहा है.

कई प्रखंडों में केवाइसी के नाम पर रकम वसूलने, मनमानी करने आदि की शिकायतें भी आ रहीं हैं. कई प्रखंडों में गैस की कालाबाजारी की भी सूचना मिल रही है. बताया जा रहा है कि जिले में पूर्व से आपूर्ति किये जा रहे गैस सिलिंडरों में लगभग 20 प्रतिशत की कटौती कर दी गयी है, जिससे यह समस्या उत्पन्न हुई है. जिला मुख्यालय में जैन गैस एजेंसी, भारत गैस एजेंसी और गिरिडीह गैस एजेंसी एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति करती है. इन एजेंसियों के गोदामों के पास ही गैस लेने के लिए सुबह से ही उपभोक्ताओं की लंबी कतार लग जाती है. कई जगह तो मारा-मारी वाली स्थिति भी उत्पन्न हो गयी है.

40 हजार उपभोक्ता है, पर मिलता है नौ हजार गैस सिलेंडर : जैन गैस एजेंसी

इस मामले में जैन गैस एजेंसी के महेश जैन का कहना है कि मांग के अनुरूप सिलेंडर की आपूर्ति नहीं हो रही है, जिसके कारण उपभोक्ताओं को कतार में खड़ा होना पड़ रहा है. बताया कि इस बाबत उन्होंने गिरिडीह के उपायुक्त, अनुमंडल पदाधिकारी समेत कई अधिकारियों को पत्र भी लिखा है. उन्होंने कहा कि उनके पास लगभग 40 हजार उपभोक्ता हैं. इनमें से लगभग सभी उपभोक्ता अब सक्रिय हो गये हैं. जो लोग पूर्व में नहीं ले रहे थे, वे भी केवाइसी करवा गैस सिलिंडर ले रहे हैं. प्रतिदिन एक हजार से 1200 गैस सिलिंडर की मांग हो रही है, लेकिन आपूर्ति मात्र 350 की होती है. प्रत्येक दिन 500 रशीद काटी जा रही है. लेकिन, लगभग डेढ़ सौ बैकलॉग हो जा रहा है. यह भी बताया कि उन्हें पूर्व में 13 हजार गैस सिलिंडर प्रति माह आपूर्ति की जाती थी, लेकिन अब इसमें 20 प्रतिशत की कटौती करते हुए लगभग नौ हजार सिलेंडर ही उन्हें मिल रहा है.

कॉमर्शियल गैस सिलिंडर की आपूर्ति एक माह से बंद

गैस सिलिंडर की आपूर्ति प्रभावित होने से सबसे ज्यादा होटलों, रेस्टोरेंट और छोटे-मोटे उद्योग धंधों पर भी पड़ा है. कई गैस एजेंसियों को कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति पिछले एक माह से बंद कर दी गयी है. ऐसे स्थानों में घरेलू गैस सिलेंडर की कालाबाजारी की शिकायतें ज्यादा मिल रही है. सूत्रों की मानें तो गिरिडीह जिला मुख्यालय के कई होटलों और फैक्ट्रियों में घरेलू गैस सिलेंडर का इस्तेमाल किया जा रहा है. बता दें कि गिरिडीह में कई फैक्ट्रियां कॉमर्शियल गैस सिलेंडर का इस्तेमाल करती है. कई फैक्ट्रियों के संचालकों को भी कॉमर्शियल गैस सिलिंडर नहीं मिलने से परेशानी हो रही है. फुटपाथ पर जलने वाले चूल्हे अब डीजल और केरोसिन से जलाये जा रहे हैं. फुटपाथ दुकानों में गैस का इस्तेमाल काफी कम हो गया है.

मनमानी और कालाबाजारी बर्दाश्त नहीं की जायेगी : डीएसओ

जिला आपूर्ति पदाधिकारी (डीेसओ) गुलाम समदानी खुद क्षेत्र का भ्रमण कर वितरण व्यवस्था पर नजर रखे हुए हैं. पिछले दिनों उन्होंने कई प्रखंडों के साथ-साथ जिला मुख्यालय के गैस एजेंसियों के गोदामों का भी निरीक्षण किया. डीएसओ ने कहा कि किसी भी गैस एजेंसी की मनमानी और कालाबाजारी बर्दाश्त नहीं की जायेगी. उन्होंने कहा कि पूरी स्थिति पर नजर रखी जा रही है. जहां से शिकायतें मिल रही है, वहां के एजेंसी को फटकार भी लगायी जा रही है. बताया कि आपूर्ति कम होने से कई इलाके में गैस की किल्लत हुई है.

जमुआ : स्लो सर्वर और सप्लाई के फेर में फंसे ग्रामीण उपभोक्ता

जमुआ प्रखंड क्षेत्र में इन दिनों रसोई गैस की भारी किल्लत ने लोग परेशान हैं. ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ता गैस सिलिंडरों के लिए भटकने को मजबूर हैं, लेकिन स्थिति सुधरने का नाम नहीं ले रही है. एक तरफ जहां गैस वितरण वाहनों का कोई ठिकाना नहीं है, वहीं दूसरी तरफ तकनीकी खामियों ने उपभोक्ताओं की परेशानी को दोगुना कर दिया है. ग्रामीणों का आरोप है कि गैस वितरण के लिए आने वाली गाड़ी सप्ताह में मात्र दो बार ही क्षेत्र का दौरा करती है. यह समय और दिन भी निश्चित नहीं होने के कारण, दूर-दराज के गांवों से आने वाले उपभोक्ताओं को अक्सर खाली हाथ लौटना पड़ता है. कई बार लोगों को पूरा दिन सड़क किनारे खड़े होकर गाड़ी का इंतजार करना पड़ता है और अंत में निराशा ही हाथ लगती है. गैस सप्लाई की कमी के साथ-साथ स्लो सर्वर एक बड़ी बाधा है. उपभोक्ताओं ने बताया कि गैस एजेंसी जाने पर सर्वर डाउन होने का हवाला देकर घंटों बैठाया जाता है. मोबाइल एप या ऑनलाइन माध्यम से बुकिंग करने पर सर्वर एरर के कारण प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती. ग्रामीण विजयकांत चौधरी, मो हनिफ अंसारी, बासुदेव सिंह, मनोज यादव, कार्तिक महतो, मालती देवी, सुगनी देवी आदि बताते है कि गैस एजेंसी की परेशानी के चलते चूल्हे पर लौटने की मजबूरी है.

क्या कहते हैं वितरक :

जमुआ नीलकांत इंडेन ग्रामीण गैस वितरक विजय राय व बेरहाबाद की गैस वितरक उर्मिला देवी ने कहा कि नियमित रूप से गैस की आपूर्ति नहीं हो रही है. सर्वर स्लो रहने से भी बुकिंग कार्य काफी धीमा है. केवाइसी करने में भी परेशानी हो रही है.

देवरी : गैस के लिए धूप में खड़ रहते हैं उपभोक्ता

देवरी प्रखंड में रसोई गैस के लिए एलपीजी वितरण केंद्र के कतार लग रही है. शुक्रवार को कड़ी धूप में भी लोग एलपीजी गैस के लिए कतार में लगे दिखे. दोपहर तक कतार में लगे लोगों को गैस उपलब्ध करवाया जा रहा था. सर्वाधिक भीड़ चंदन इंडेन वितरक केंद्र देवरी में दिखी. इस संबंध में देवरी के आपूर्ति पदाधिकारी विवेक कुमार ने बताया कि एलपीजी वितरण केंद्रों पर घरेलू उपभोक्ताओं के बीच शांतिपूर्ण तरीके से एलपीजी गैस वितरण करवाया जा रहा है.

गांडेय : गैस सिलिंडर की किल्लत नहीं, केवाइसी के लिए उमड़ी रही भीड़

गांडेय में पेट्रोल, डीजल या गैस सिलिंडर की कमी नहीं है. लेकिन, लोग दिग्भ्रमित होकर गैस के लिए आपाधापी कर रहे हैं. इस संबंध में श्रीराम इंडेन गैस ग्रामीण वितरक के राम जी मोदी ने बताया कि हमारे पास पर्याप्त मात्रा में गैस सिलेंडर स्टॉक है. लाभुक गैस सिलेंडर के लिए मिस कॉल करते हैं और ओटीपी आने के बाद उन्हें सिलिंडर मिलता है. भीड़ के सवाल पर कहा कि उज्ज्वला योजना के लाभुक, जिनकी अवधि पांच वर्ष हो गयी है, उन्हें केवाइसी करना पड़ रहा है. इसके कारण भीड़ नजर आ रही है. कहा कि उज्ज्वला योजना का लाभ लेते समय किसी ने दूसरे का नंबर दे दिया था, उन्हें अब अपना नंबर डालना पड़ रहा है. इसके कारण आपाधापी मची है. इधर, श्री अग्रसेन भारत गैस वितरक ताराटांड़ के संचालक सुधांशु अग्रवाल ने कहा कि गैस सिलेंडर की कोई कमी नहीं है. ग्राहक के अनुरूप स्टॉक भी है. कहा कि सरकारी प्रावधान के तहत वितरण में कोई दिक्कत नहीं है. लेकिन बगैर कनेक्शन वाले, अर्हता से परे कुछ लोग गैस सिलिंडर के लिए आपाधापी करते हैं जिससे परेशानी होती है.

बगोदर के कई होटलों में दिख रहा गैस संकट का असर

गैस लेने को लेकर जारी नियमावली से जहां परिवार वालों पर जहां असर पड़ रहा है, वहीं बगोदर में होटल व्यवसायी भी प्रभावित होने लगे है. हालांकि, बगोदर इलाके में घरेलू गैस की आपूर्ति में अपेक्षाकृत कोई समस्या नहीं दिख रही है. लेकिन, बगोदर क्षेत्र में कॉमर्शियल गैस की भारी किल्लत हो गयी है. इसके कारण कई होटल संचालक या तो इसका विकल्प ढूंढ रहें हैं या फिर गैस को महंगे दामों में लेकर काम चलाना मजबूरी है. बता दें कि बगोदर बस पड़ाव और बाजार में होटल, फास्ट फूड की ठेले का एक बड़ा हब माना जाता है. बस पड़ाव और आसपास करीब एक सौ की संख्या में फास्ट फूड के ठेले लगते हैं, जिससे ठेले लोगों का जीविका भी चलती है, लेकिन गैस सिलिंडर की किल्लत से उनके व्यवसाय पर असर पड़ रहा है. कॉमर्शियल गैस नहीं मिलने से होटल और फास्ट फूड के ठेले बंद होने के कगार पर पहुंच गया है. बगोदर के ही लड्डू गोपाल स्वीट्स के संचालक रवि कुमार ने बताया कि पहले सिलिंडर मिलने में परेशानी नहीं होती थी, जिससे होटल में नमकीन के आइटम भी बनते थे. गैस सिलिंडर नहीं मिलने से जैसे-तैसे कोयला का उपयोग कर काम चला रहें हैं. दुकानदारी प्रभावित हो रही है. वहीं, बस पड़ाव के एक फास्ट फूड विक्रेता ने बताया कि गैस सिलिंडर नहीं मिलने से आठ दिनों से दुकान बंद है. यही हालत हरिहरधाम रोड के आसपास कई फास्ट फूड दुकानों की भी हाल है, जो तीन-चार दिन दुकान खुलने के बाद बंद हो रहें हैं.

दो-तीन हजार में मिल रहा सिलिंडर

बगोदर में सिलिंडर की कालबाजारी हो रही है. दो से तीन हजार में सिलिंडर बेचा जा रहा है. बगोदर बाजार में ऐसे कई दुकानदार हैं, जो गैस नहीं मिलने की स्थिति में कोयला से काम चला रहें है. इसके कारण इन दिनों कोयला भी महंगा हो गया है. इसके अलावा कई सरकारी भवनों के कार्य में लगे मजदूर को भी परेशानी है. उनका खाना गैस पर बनता था, पर गैस के अभाव में खाना खाने के लिए होटलों का सहारा लेना पड़ रहा है.

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By PRADEEP KUMAR

PRADEEP KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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