राकेश सिन्हा
गिरिडीह : जिला अधिवक्ता संघ के 16 पदों के लिए चुनाव 24 मई को होना है. चुनाव को लेकर देर रात तक संपर्क अभियान चल रहा है. विभिन्न पदों को लेकर गुटबाजी भी चरम पर पहुंच गया है. इस बार के चुनाव में अध्यक्ष पद पर प्रकाश सहाय के खड़ा नहीं होने के कारण श्री कृष्ण मुरारी और कंचन माला एक ही गुट में शामिल हो गये हैं.
इस गुट का संघ में वर्चस्व हो, इसको लेकर ज्यादा से ज्यादा पदों पर कब्जा की तैयारी की जा रही है. हालांकि एक गुट के एक ही पद के लिए एक से ज्यादा उम्मीदवार के खड़ा हो जाने से असमंजस की स्थिति भी उत्पन्न हो गयी है. अध्यक्ष पद के लिए पांच अधिवक्ता चुनावी मैदान में हैं, जिसमें श्रीकृष्ण मुरारी और कंचनमाला एक-दूसरे के लिए सहारा बने हुए हैं. श्रीकृष्ण मुरारी को अध्यक्ष पद के लिए कंचनमाला के गुट का समर्थन मिल रहा है, वहीं कंचनमाला को सचिव पद के लिए श्रीकृष्ण मुरारी गुट का. ऐसी स्थिति में भूमिहार और कायस्थ मतदाताओं का ध्रुवीकरण इस गुट के पक्ष में होता दिख रहा है.
अध्यक्ष पद के लिए पूर्व अध्यक्ष रहे महेंद्र प्रसाद भी चुनावी मैदान में हैं. श्री प्रसाद भी कायस्थ मतों में सेंधमारी के प्रयास में हैं. सचिव पद के लिए अधिवक्ता कंचनमाला, चुन्नूकांत और पुरन महतो ने मतों को ध्रुवीकरण कराने के लिए ऐड़ी चोटी एक कर दी है. देर रात तक ये प्रत्याशी अधिवक्ताओं के बीच संपर्क अभियान चलाकर जीत का समीकरण बनाने के प्रयास में हैं. कंचनमाला जहां पूर्व में किये गये बेहतर कार्यो को लेकर समर्थन मांग रही है, वहीं चुन्नूकांत अधिवक्ताओं के हितों की बात कर मतदाताओं को आकर्षित करने का प्रयास कर रहे हैं. चुन्नूकांत की नजर कायस्थ व पिछड़ी जाति के मतदाताओं पर टिकी हुई है. पिछड़ी जाति के मतदाता कई गुटों में बंटे नजर आ रहे हैं. पिछड़ी जाति के मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा पुरन महतो के पक्ष में दिख रहा है.
वहीं पुरन महतो से नाराज पिछड़ी जाति के गुट का समर्थन लेने के लिए चुन्नूकांत ने अपना अभियान तेज कर दिया है. माना यह जा रहा है कि कंचनमाला को हराने की स्थिति में यदि चुन्नूकांत व पुरन महतो में से जो कोई एक मजबूत होंगे, उनके समर्थन में यह गुट मतदान कर सकता है. इधर, कंचनमाला के पक्ष में श्रीकृष्ण मुरारी, संयुक्त सचिव के पद पर खड़ा मिर्जा मुमताज अली, अजय कुमार सिन्हा, विनय कुमार बख्शी, नित्यानंद प्रसाद समेत अन्य अधिवक्ता को खुलकर समर्थन करते देखा जा रहा है. फिलहाल सचिव पद के लिए मुकाबला त्रिकोणीय बना हुआ है. अन्य पदों पर एक ही गुट के कई लोगों के खड़ा हो जाने से असमंजस की स्थिति भी बनी हुई है.
संयुक्त सचिव (प्रशासन) के पद के लिए एक ही गुट के अजय कुमार सिन्हा व मिर्जा मुमताज अली खड़े हैं. ये दोनों कंचनमाला गुट के माने जाते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि संयुक्त सचिव (प्रशासन) के पद के लिए कंचनमाला गुट का समर्थन किसे हासिल होगा? मतदाताओं में भी इस बात को लेकर असमंजस की स्थिति है. कोषाध्यक्ष पद के लिए एक ही गुट के अनिल कुमार सिन्हा, नित्यानंद प्रसाद और राजीव कुमार सिन्हा चुनावी मैदान में हैं. जबकि एग्जिक्यूटिव के 9 पदों के लिए एक ही गुट के 14 लोग मैदान में हैं.
अब इस गुट में से कंचनमाला के समर्थक वैसे लोगों को चिन्हित करने में लगे हुए हैं, जो अध्यक्ष पद के लिए महेंद्र प्रसाद, दुर्गा प्रसाद पांडेय या विरेंद्र प्रसाद और सचिव पद के लिए चुन्नूकांत या पुरन महतो को समर्थन करने का मन बनाये हुए हैं. हालांकि एग्जिक्यूटिव पद के लिए चुनाव लड़ रहे कमलेश्वर नारायण देव, मीरा कुमारी, विशाल आनंद समेत कई अधिवक्ताओं ने कहा कि बार की बेहतरी के लिए अध्यक्ष व सचिव पद के उम्मीदवार का वे समर्थन करेंगे. बहरहाल, जिला अधिवक्ता संघ के चुनाव को लेकर चुनावी सरगर्मी तेज है और जातीय आधार पर मतों को गोलबंद कराने का प्रयास भी तेज कर दिया गया है.
