अब भी नहीं मिल रहा स्कीम का लाभ

अधिवक्ताओं के लिए झारखंड में 2013 में हुआ था लागू राकेश सिन्हा गिरिडीह : झारखंड में अधिवक्ताओं के लिए पेंशन एक्ट 2013 में ही लागू कर दिया गया है, परंतु इस एक्ट का लाभ झारखंड के अधिवक्ताओं को नहीं मिल पा रहा है. झारखंड में लगभग 50 से भी ज्यादा वरीय अधिवक्ताओं ने इस स्कीम […]

अधिवक्ताओं के लिए झारखंड में 2013 में हुआ था लागू

राकेश सिन्हा

गिरिडीह : झारखंड में अधिवक्ताओं के लिए पेंशन एक्ट 2013 में ही लागू कर दिया गया है, परंतु इस एक्ट का लाभ झारखंड के अधिवक्ताओं को नहीं मिल पा रहा है. झारखंड में लगभग 50 से भी ज्यादा वरीय अधिवक्ताओं ने इस स्कीम का लाभ लेने के लिए आवेदन किया है. इसमें 6 अधिवक्ता गिरिडीह के भी शामिल हैं. सभी तरह की शर्ते पूरी कर लेने के बाद भी इन अधिवक्ताओं का आवेदन झारखंड स्टेट बार काउंसिल की पेंशन कमेटी के पास पड़ा हुआ है.

इस एक्ट में प्रावधान है कि जिस अधिवक्ता की उम्र 65 वर्ष या उससे ऊपर है, उन्हें पेंशन स्कीम के तहत पांच हजार रुपये प्रत्येक माह दिये जायेंगे. इसके लिए कुछ शर्ते भी लागू की गयी है. जिन अधिवक्ताओं की उम्र 70 साल से ऊपर है और जिनकी सेवा 30 साल की हो चुकी है, उन्हें 45 हजार रुपये जमा करना है और साथ ही 18 हजार रुपये का झारखंड लॉ जर्नल की खरीदी करनी है. इन शर्तो को पूरा करने के बाद भी गिरिडीह के अधिवक्ता रामलखन प्रसाद, गणपत प्रसाद वर्मा, द्वारिका प्रसाद केशरी, अवध किशोर प्रसाद समेत छह अधिवक्ताओं का पेंशन स्कीम चालू नहीं हो सका.

अगली बैठक में होगा समस्या का समाधान : परमेश्वर

इस बाबत झारखंड स्टेट बार काउंसिल के कार्यकारी उपाध्यक्ष परमेश्वर मंडल कहते हैं कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने झारखंड के लिए पेंशन एक्ट को पारित कर दिया है. लेकिन झारखंड के एडवोकेट जेनरल और कानून सचिव ने कुछ बिंदुओं पर आपत्ति दर्ज की है, जिसके कारण यह मामला अटक गया है. उन्होंने कहा कि पेंशन कमेटी की अगली बैठक में इस समस्या का समाधान हो जायेगा और पेंशन स्कीम का लाभ झारखंड के अधिवक्ताओं को मिलने लगेगा.

बार एसोसिएशन चुनाव में छाया हुआ है मुद्दा : इस मामले में गिरिडीह डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन की सचिव कंचन माला ने कहा कि पेंशन स्कीम का लाभ अधिवक्ताओं को दिलाने के लिए झारखंड स्टेट बार काउंसिल के ऊपर कई बार दबाव बनाया गया. गिरिडीह जिले के 6 अधिवक्ताओं का आवेदन तमाम शर्तो को पूरा करते हुए भेजा गया. उन्होंने कहा कि जिन अधिवक्ताओं की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, उन्हें इस स्कीम के लाभ के लिए लोन तक मुहैया कराया गया, परंतु मामला अब तक लटका हुआ है.

बहरहाल गिरिडीह बार एसोसिएशन के हो रहे चुनाव में यह मुद्दा भी छाया हुआ है. अधिवक्ताओं का कहना है कि इस पेंशन स्कीम के लागू होने से कई लोगों को राहत मिल सकेगी, पर मामले को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है. सचिव पद के लिए चुनाव लड़ रहे अधिवक्ता चुन्नूकांत कहते हैं कि यह एक बड़ा और गंभीर मुद्दा है. हमारी लड़ाई इन्हीं मुद्दों के लिए होगी. अधिवक्ताओं के हितों और उनके सम्मान की रक्षा के लिए मैं हर संभव प्रयास करूंगा.

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