World Toilet Day 2021: गढ़वा में शौचालय निर्माण पर खर्च हुए अरबों रुपये, फिर भी खुले में शौच जाते हैं लोग

स्वच्छ भारत मिशन के तहत गढ़वा जिले में करीब सवा दो लाख शौचालय भवन बना. इस पर अरबों रुपये खर्च भी हुए. इसके बावजूद जिले के 80 फीसदी लोग आज भी खुले में शौच जाते हैं. अब लोग घर में बने शौचालय में नहीं जानने का कारण भी गिनाते नहीं थक रहे हैं.

By Prabhat Khabar Print Desk | November 18, 2021 6:36 PM

World Toilet Day 2021 (पीयूष तिवारी, गढ़वा) : झारखंड के गढ़वा जिले को खुले में शौच मुक्त घोषित किया गया है. यहां स्वच्छ भारत अभियान के तहत 2.15 लाख शौचालय बनाये गये हैं. इस पर 2.58 अरब रुपये खर्च हुए हैं. इसके बावजूद गढ़वा जिले के 80 प्रतिशत शौचालय का लाभ लेनेवाले लोग आज भी खुले में ही शौच जाते हैं.

उल्लेखनीय है कि साल 2014 में तामझाम के साथ गढ़वा में स्वच्छ भारत अभियान शुरू किया गया था. शुरू के एक-दो साल तक SBM कर्मियों एवं पदाधिकारियों ने मिलकर बेस लाईन सर्वे तैयार किया. इस बेस लाईन सर्वे के आधार पर जिले में 1,64,084 शौचालय का निर्माण कराया गया. इसके बाद वित्तीय वर्ष 2019-20 में छूटे हुए घरों में शौचालय बनाने के अभियान के तहत 12,200 घरों एवं वित्तीय वर्ष 2020-21 में कोई भी घर छूटे नहीं अभियान के तहत 38,914 घरों में शौचालय का निर्माण कराया गया. इसमें प्रत्येक शौचालय की लागत 12 हजार रुपये रखी गयी थी.

गढ़वा जिले के 3 पंचायतों वाले प्रखंड डंडा को सबसे पहले ODF घोषित किया गया था. तब इसका जश्न मनाने में लाखों रुपये खर्च किये गये. लेकिन, जिले के पहले ODF प्रखंड के लोग भी आज शौचालय का प्रयोग करने की बजाय खेतों में जाते हैं.

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SBM फेज 2 में बनेंगे 6200 शौचालय

गढ़वा जिले में स्वच्छ भारत अभियान फेज 2 के तहत नये बनाये गये 6200 घरों में भी शौचालय का निर्माण कराने का लक्ष्य रखा गया है. यह अभियान भी बहुत जल्द शुरू किया जाना है. इसके अलावे इसी दिसंबर महीने से गढ़वा जिले में स्वच्छता सर्वेक्षण 2021 शुरू किया जा रहा है. इसमें SBM के कार्यकर्ता घरों में जाकर इस बात का आकलन करेंगे कि ग्रामीण बनाये गये शौचालय का उपयोग कर रहे हैं या नहीं. इसके साथ ही ठोस कचरा प्रबंधन एवं तरल कचरा प्रबंधन का भी निरीक्षण किया जायेगा. इसके बाद ही प्रशासनिक स्तर से शौचालय के उपयोग की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.

क्यों लोग नहीं कर रहे शौचालय का उपयोग

इस संबंध में मेराल निवासी योगेंद्र कुमार ने बताया कि स्वच्छ भारत अभियान के तहत बनाये जा रहे शौचालयों के गड्ढे इतने छोटे हैं कि इसका उपयोग करने के दौरान यह जल्दी ही भर जाता है, लेकिन इसे साफ करने के लिए ना तो घर का कोई सदस्य और ना ही कोई मजदूर तैयार है. इस वजह से भी ग्रामीण क्षेत्र के लोग इसका उपयोग नहीं कर रहे हैं. इसलिए लोग खेतों में जाना ही उचित समझते हैं. इसके अलावे स्वच्छ भारत अभियान के तहत बनाये गये शौचालयों की गुणवत्ता भी सही नहीं है. इस वजह से भी लोग इसका उपयोग नहीं करते.

Posted By : Samir Ranjan.

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