गढ़वा से प्रभाष मिश्रा की रिपोर्ट
Garhwa News: झारखंड के गढ़वा जिले के रमकंडा थाना क्षेत्र अंतर्गत बलीगढ़ गांव में चुआड़ का गंदा पानी पीने से तीन महिलाओं की तबीयत अचानक बिगड़ गई. इनमें से एक महिला की हालत गंभीर होने पर उसे इलाज के लिए गढ़वा सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उसका उपचार चल रहा है. बीमार महिला की पहचान बलीगढ़ गांव निवासी विक्रम भुइयां की पत्नी सुनीता देवी के रूप में की गई है. घटना के बाद गांव और आसपास के इलाके में चिंता का माहौल है. ग्रामीणों का कहना है कि भीषण गर्मी और पेयजल संकट के कारण लोग मजबूरी में असुरक्षित जल स्रोतों का इस्तेमाल कर रहे हैं.
प्यास बुझाने के लिए खोदी चुआड़ी
घटना के संबंध में पीड़ित सुनीता देवी ने बताया कि वह गांव की दो अन्य महिलाओं के साथ बलीगढ़ जंगल में लकड़ी चुनने गई थीं. दोपहर के समय तेज गर्मी के कारण तीनों महिलाओं को जोरदार प्यास लगी. आसपास कहीं भी पीने योग्य पानी उपलब्ध नहीं था. इसी दौरान महिलाओं ने जंगल से गुजरने वाली नदी के किनारे रेत हटाकर एक छोटा गड्ढा खोदा, जिसे स्थानीय भाषा में चुआड़ी कहा जाता है. गड्ढे में जमा पानी को साफ समझकर तीनों महिलाओं ने पी लिया. हालांकि यह पानी दूषित निकला और कुछ ही देर बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी.
पानी पीते ही शुरू हुई उल्टियां
महिलाओं ने बताया कि पानी पीने के थोड़ी देर बाद ही पेट में तेज ऐंठन और लगातार उल्टियां शुरू हो गईं. हालत इतनी खराब हो गई कि वे जंगल में चुनी हुई लकड़ियां छोड़कर किसी तरह पैदल अपने घर पहुंचीं. घर पहुंचने के बाद महिलाओं ने परिजनों को पूरी घटना की जानकारी दी. इसके बाद परिवार वालों ने तत्काल इलाज की व्यवस्था शुरू की. सुनीता देवी की हालत सबसे ज्यादा खराब थी. उन्हें लगातार उल्टियां और कमजोरी महसूस हो रही थी. परिजनों ने पहले उन्हें रंका सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार किया. लेकिन स्थिति गंभीर होने के कारण चिकित्सकों ने बेहतर इलाज के लिए उन्हें गढ़वा सदर अस्पताल रेफर कर दिया.
सदर अस्पताल में चल रहा इलाज
सदर अस्पताल में भर्ती सुनीता देवी का इलाज चिकित्सकों की देखरेख में चल रहा है. डॉक्टरों का कहना है कि दूषित पानी पीने के कारण संक्रमण और फूड प्वाइजनिंग जैसी स्थिति उत्पन्न हुई है. फिलहाल मरीज की हालत पर लगातार नजर रखी जा रही है. वहीं अन्य दो महिलाओं का स्थानीय स्तर पर इलाज चल रहा है और उन्हें खतरे से बाहर बताया जा रहा है. स्वास्थ्य विभाग की टीम भी मामले की जानकारी लेने में जुटी हुई है.
पेयजल संकट ने बढ़ाई परेशानी
इस घटना ने एक बार फिर गढ़वा के ग्रामीण और जंगली इलाकों में गहराते पेयजल संकट की पोल खोल दी है. ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी बढ़ने के साथ ही जलस्तर काफी नीचे चला गया है. कई गांवों में हैंडपंप और कुएं सूखने लगे हैं, जिसके कारण लोगों को नदी-नालों और चुआड़ी के पानी पर निर्भर होना पड़ रहा है. विशेषकर पथरीले और जंगल से घिरे इलाकों में हालात ज्यादा खराब हैं. वहां पीने के लिए स्वच्छ पानी की व्यवस्था नहीं होने के कारण ग्रामीण जोखिम उठाने को मजबूर हैं. दूषित पानी के इस्तेमाल से डायरिया, उल्टी और पेट संबंधी बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है.
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ग्रामीणों ने की स्थायी समाधान की मांग
घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की है. स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल गर्मी के मौसम में पानी की समस्या गंभीर हो जाती है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल पा रहा है. ग्रामीणों ने जंगल और पहाड़ी क्षेत्रों में अतिरिक्त चापाकल लगाने तथा पेयजल योजनाओं को जल्द शुरू करने की मांग की है, ताकि लोगों को दूषित पानी पीने के लिए मजबूर न होना पड़े.
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