समय पर गैस सिलेंडर नहीं मिलने से ग्रामीण फिर जंगल पर निर्भर

महिलाएं रोजाना लकड़ी लाकर चूल्हा जलाने को मजबूर

महिलाएं रोजाना लकड़ी लाकर चूल्हा जलाने को मजबूर प्रतिनिधि, डंडई डंडई प्रखंड क्षेत्र में रसोई गैस की बढ़ती कीमत और समय पर सिलेंडर न मिलने के कारण ग्रामीणों को फिर जंगल की ओर रुख करना पड़ रहा है. प्रखंड के तसरार, बालेखांड, लामी, फुलवार और लवादोनी सहित कई गांवों में महिलाएं रोजाना खाना पकाने के लिए जंगल से लकड़ी लाती हैं. गैस के समय पर नहीं मिलने और महंगाई का सीधा असर गरीब और आदिवासी परिवारों पर पड़ रहा है. फुलवार गांव की फुलमानिया देवी ने बताया कि सरकार की योजना के तहत गैस कनेक्शन तो मिला है, लेकिन महंगाई के कारण सिलेंडर भरवाना मुश्किल हो गया है. लामी गांव की ललिता देवी ने कहा कि महिलाएं सुबह जंगल जाती हैं और सूखी लकड़ी काटकर घर लाती हैं ताकि परिवार के लिए भोजन पकाया जा सके. मुख्यालय निवासी विजय प्रसाद ने बताया कि उनके घर में गैस खत्म होने के बाद कई दुकानों के चक्कर लगाने के बावजूद सिलेंडर नहीं मिला और अंततः उन्हें 25 किलोमीटर दूर गढ़वा से सिलेंडर मंगवाना पड़ा. विधायक प्रतिनिधि तेज बहादुर सिंह ने कहा कि कुछ स्थानों पर सिलेंडर कालाबाजारी के जरिए महंगे दाम पर बेचे जा रहे हैं और प्रशासन को इस पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए. झामुमो नेता और जिला प्रतिनिधि नीलकंठ सिंह ने कहा कि गैस की बढ़ती कीमतों का सबसे अधिक असर गरीब और ग्रामीण परिवारों पर पड़ रहा है. पचोर मुखिया प्रतिनिधि कृष्णकांत सिंह ने कहा कि जंगलों से घिरे डंडई प्रखंड में गैस की कमी से ग्रामीण मजबूर होकर लकड़ी पर निर्भर हो रहे हैं और प्रशासन को नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए. ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर गैस मिले और कीमत नियंत्रित रहे तो जंगल पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा.

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By Akarsh Aniket

Akarsh Aniket is a contributor at Prabhat Khabar.

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