पंचायती राज जनता की ताकत और विकास है : अरविंद तिवारी

गुरूवार को प्रखंड भवनाथपुर के कैलान पंचायत भवन में राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया.

प्रतिनिधि भवनाथपुर सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण गढ़वा के अध्यक्ष नलिन कुमार एवं सचिव निभा रंजन लकड़ा के आदेशानुसार गुरूवार को प्रखंड भवनाथपुर के कैलान पंचायत भवन में राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया. जिसमें कैलान पंचायत के जनप्रतिनिधि के रूप में पंचायत के उप मुखिया सुरेंद्र यादव उपस्थित हुए. मौके पर बताया गया कि आज पंचायत को समृद्ध और सशक्त बनाने के लिए स्थानीय स्तर पर शासन की व्यवस्था लोगों के लिए की गयी है. जिससे आप अपने को आगे बढ़ा सकते हैं.पीएलवी अरविंद तिवारी ने कहा कि पंचायती राज व्यवस्था भारत में 1959 को लागू हुई थी. यह सबसे पहले राजस्थान के नागौर जिला से प्रारंभ हुई थी ,जिसके बाद पूरे भारत में यह व्यवस्था लागू हो गयी. इसके अलावा घरेलू हिंसा, मनरेगा , बाल विवाह बाल मजदूरी बच्चों को विद्यालय में भेजना डायन प्रथा , कानूनी जानकारी वृद्धा पेंशन विधवा पेंशन उपलब्ध करवाना है. मौके पर वृद्धा पेंशन के लिए रामचंद्र यादव उम्र 65 वर्ष कामेश्वर यादव उम्र 60 वर्ष का आवेदन लिया और तत्काल सीएसपी संचालक शंभू साहू को ऑनलाइन करने के लिए सौंपा. मौके उप मुखिया सुरेंद्र यादव, रीमा देवी, पटिया कुमार, कलावती देवी, कुलदीप यादव, विमलेश भैया, स्वयंसेवक गुड्डू यादव, उपेंद्र यादव, अजीत कुमार साह, शंभू यादव आदि ग्रामीण उपस्थित थे.

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By VIKASH NATH

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नगर निकाय चुनाव में नहीं चला विधानसभा का गणितगढ़वा नगर परिषद चुनाव में भाजपा, झामुमो, कांग्रेस व राजद को उम्मीद से कम मिले मत- अध्यक्ष पद पर निर्दलीय प्रत्याशी की जीत ने चौंकाया- पिछले मत प्रतिशत को बरकरार नहीं रख सके बड़े दलपीयूष तिवारी, गढ़वागढ़वा नगर परिषद चुनाव संपन्न होने के बाद प्रत्याशियों को मिले मतों और उनके जीत-हार के समीकरणों की चर्चा शहर के नुक्कड़ों और चौक-चौराहों पर तेज हो गयी है. बिना किसी दल और बड़े नेताओं के समर्थन के दौलत सोनी की अध्यक्ष पद पर जीत ने सभी को चौंका दिया है. इस चुनाव में झामुमो, कांग्रेस, राजद और भाजपा जैसे बड़े दलों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी थी. लेकिन परिणामों ने इन दलों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. करीब 15 महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव में इन दलों को जो मत मिले थे, उन्हें वे अपने समर्थित प्रत्याशियों के माध्यम से बरकरार नहीं रख सके. सबसे खराब स्थिति भाजपा की रही है. विधानसभा चुनाव 2024 में भाजपा शहर के 33 बूथों में से 30 बूथों पर पहले स्थान पर रही थी. शहरी क्षेत्र से पार्टी को 15 हजार से अधिक मत प्राप्त हुए थे. इसके विपरीत नगर निकाय चुनाव में भाजपा के अध्यक्ष पद की प्रत्याशी कंचन जायसवाल को मात्र 2582 मत मिले. यदि भाजपा के बागी प्रत्याशी अलखनाथ पांडेय को मिले 2701 मत भी जोड़ दिये जाएं, तो कुल आंकड़ा लगभग 5300 तक ही पहुंचता है. यह संख्या विधानसभा चुनाव में मिले मतों की तुलना में काफी कम है.पिछले निकाय चुनाव के मत भी नहीं बचा सकी भाजपावर्ष 2018 के नगर निकाय चुनाव में अलखनाथ पांडेय की पत्नी मीरा पांडेय ने भाजपा के टिकट पर उपाध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा था. उन्हें 6899 मत मिले थे. वहीं निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उपाध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ने वाले विनोद जायसवाल (2026 में भाजपा समर्थित प्रत्याशी कंचन जायसवाल के पति) को 3810 मत प्राप्त हुए थे. वर्तमान चुनाव में ये दोनों ही परिवार अपने पुराने प्रदर्शन को दोहरा नहीं सके. न तो विधानसभा चुनाव में मिले मतों को बरकरार रख पाये और न ही पिछले निकाय चुनाव के आंकड़े तक पहुंच सके.झामुमो और कांग्रेस का गठजोड़ भी नहीं दिला सका जीतगढ़वा नगर परिषद चुनाव में झामुमो ने संतोष केसरी को अपना समर्थित प्रत्याशी बनाया था. कांग्रेस ने भी उन्हें समर्थन दिया. दो बड़े दलों के समर्थन के बावजूद संतोष केसरी को मात्र 3790 मत प्राप्त हुए. वर्ष 2018 के निकाय चुनाव में महिला आरक्षित सीट होने के कारण संतोष केसरी की पत्नी पिंकी केसरी अध्यक्ष पद की प्रत्याशी थीं. तब उन्हें 6411 मत मिले थे और वे भाजपा प्रत्याशी थीं. उसी चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी कमर सफदर को केवल 420 मत प्राप्त हुए थे. दोनों दलों को उम्मीद थी कि संयुक्त रूप से वे करीब सात हजार मत प्राप्त कर संतोष केसरी को जीत दिला देंगे. लेकिन यह रणनीति सफल नहीं हो सकी.54 मतों से हारने वाली अनिता दत्ता को इस बार केवल 215 मतवर्ष 2018 के नगर परिषद चुनाव में झामुमो की प्रत्याशी अनिता दत्ता को 6357 मत मिले थे. वे मात्र 54 मतों के अंतर से पिंकी केसरी से हार गयी थीं. इस बार अनिता दत्ता को किसी दल का समर्थन नहीं मिला और वे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरीं. लेकिन उन्हें केवल 215 मतों से ही संतोष करना पड़ा.राजद भी पिछला प्रदर्शन दोहराने में विफलनगर परिषद चुनाव 2026 में राजद ने विकास माली को समर्थन दिया. विकास माली को 1222 मत प्राप्त हुए. जबकि वर्ष 2018 के चुनाव में राजद समर्थित प्रत्याशी मनिका नारायण को 5117 मत मिले थे. वहीं उपाध्यक्ष पद के लिए राजद प्रत्याशी मो शमीम को 2018 में 3728 मत प्राप्त हुए थे. कुल मिलाकर नगर परिषद चुनाव के नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस बार मतदाताओं ने दलों की बजाय प्रत्याशियों को प्राथमिकता दी. बड़े दलों की रणनीति और पुराने मत प्रतिशत इस चुनाव में कारगर साबित नहीं हुए.

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