प्रतिनिधि, गढ़वा राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नयी दिल्ली व झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार शनिवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से व्यवहार न्यायालय गढ़वा और अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय नगर ऊंटारी में इस वर्ष की द्वितीय राष्ट्रीय लोक अदालत का सफल आयोजन किया गया. लोक अदालत में विभिन्न प्रकार के कुल 1,39,439 मामलों का निष्पादन किया गया. वहीं, 2,39,48,320 रुपये से अधिक राजस्व की वसूली हुई. राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्घाटन सुजीत नारायण प्रसाद ने रांची स्थित सिविल कोर्ट के कॉन्फ्रेंस हॉल से ऑनलाइन माध्यम से किया. इस अवसर पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण गढ़वा मनोज प्रसाद, उपायुक्त सह उपाध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अनन्य मित्तल, पुलिस अधीक्षक आशुतोष शेखर, प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय मनोज चंद्र झा तथा अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम सह विशेष न्यायाधीश पोक्सो एक्ट दिनेश कुमार सहित कई न्यायिक पदाधिकारी मौजूद थे. कार्यक्रम को सफल बनाने में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, गढ़वा ने बताया कि कार्यक्रम की सफलता में न्यायालय कर्मियों, एलएडीसीएस, पैनल अधिवक्ताओं, पीएलवी, प्रशासनिक अधिकारियों और मीडिया कर्मियों का सराहनीय योगदान रहा. प्राधिकरण ने आम लोगों से अपील की कि वे विवादों के समाधान के लिए सुलह और आपसी सहमति का मार्ग अपनाते हुए लोक अदालत का अधिक से अधिक लाभ उठायें.
15 पीठों का किया गया गठन
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव निभा रंजना लकड़ा ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल आयोजन के लिए कुल 15 पीठों का गठन किया गया था. इन पीठों में व्यवहार न्यायालय गढ़वा, अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय नगर ऊंटारी, स्थायी लोक अदालत, उपभोक्ता फोरम और विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने सक्रिय भागीदारी निभायी. उन्होंने बताया कि लोक अदालत में बैंक से संबंधित 156 मामले, आपराधिक शमनीय प्रकृति के 205 मामले, बिजली विभाग के 295 मामले, मोटर वाहन अधिनियम से जुड़े 3 मामले, कुटुंब न्यायालय के 28 मामले तथा स्थायी लोक अदालत के 159 मामलों का निष्पादन किया गया. इसके अलावा अन्य सुलहनीय मामलों से संबंधित 1,38,593 मामलों का भी निपटारा किया गया.सुलह के माध्यम से हुआ विवादों का समाधान
लोक अदालत में आपसी सहमति और सुलह के आधार पर मामलों का त्वरित निष्पादन किया गया. इससे लोगों को लंबित मामलों से राहत मिली तथा समय और धन दोनों की बचत हुई. लोक अदालत के माध्यम से कुल 2 करोड़ 39 लाख 48 हजार 320 रुपये राजस्व की भी वसूली की गयी.