मनरेगा योजनाओं में गड़बड़ी, पोर्टल से छेड़छाड़ पर बीडीओ व बीपीओ को नोटिस

डेटा में बदलाव कर योजनाओं को ऑनगोइंग दिखाने का आरोप, दो दिन में मांगा जवाब

डेटा में बदलाव कर योजनाओं को ऑनगोइंग दिखाने का आरोप, दो दिन में मांगा जवाब प्रतिनिधि, रंका रंका प्रखंड में मनरेगा योजनाओं के क्रियान्वयन में बड़ी गड़बड़ी सामने आयी है. उप विकास आयुक्त पशुपति नाथ मिश्रा ने मनरेगा पोर्टल में डेटा के साथ छेड़छाड़ करने के आरोप में रंका के प्रखंड विकास पदाधिकारी शुभम बेला टोपनो और बीपीओ हासीम अंसारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. डीडीसी ने दोनों अधिकारियों को दो दिनों के भीतर अपना स्पष्टीकरण देने का कड़ा निर्देश दिया है. डीडीसी ने पत्र जारी कर स्पष्ट किया कि जांच के दौरान मनरेगा पोर्टल पर पहले से अपलोड की गयी योजनाओं के नाम और स्थान में बदलाव करने की पुष्टि हुई है. आरोप है कि पोर्टल पर दर्ज डेटा से छेड़छाड़ कर योजनाओं का स्वरूप बदल दिया गया और उन्हें ऑनगोइंग यानी सक्रिय दिखाया गया. डीडीसी ने इसे वित्तीय अनियमितता और मनरेगा मार्गदर्शिका का गंभीर उल्लंघन करार दिया है. डीडीसी ने पत्र में कड़ा रुख अपनाते हुए बीपीओ हासीम अंसारी से पूछा है कि इस गंभीर लापरवाही और नियम विरुद्ध कार्य के लिए उनकी संविदा तुरंत समाप्त क्यों न कर दी जाये. साथ ही उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को अनुशंसा भेजने की बात भी कही गयी है. इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है. प्रखंड कार्यालय में हलचल बढ़ गई है. डीडीसी ने स्पष्ट किया है कि सरकारी पोर्टल के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जायेगी. कोट पोर्टल में छेड़छाड़ करना वित्तीय गड़बड़ी और घोर लापरवाही का परिचायक है. यदि दो दिनों के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जायेगी. पशुपति नाथ मिश्रा, डीडीसी ……………….. धरातल पर कार्य शून्य, पोर्टल पर 1855 मजदूर कर रहे काम – बिना काम किये ही निकाली जा रही राशि – 200 तालाब और डोभा को फर्जी तरीके से दिखाया ऑनगोइंग नंद कुमार,रंका प्रखंड में मनरेगा पोर्टल से छेड़छाड़ का मामला सिर्फ तकनीकी चूक नहीं, बल्कि सरकारी राशि की बड़ी लूट का संकेत है. बीपीओ हासीम अंसारी पर आरोप है कि उन्होंने पोर्टल पर पहले से दर्ज करीब 200 पुराने तालाब और डोभा को ऑनगोइंग यानी सक्रिय दिखाकर सरकारी खजाने में सेंधमारी की है. चौंकाने वाली बात यह है कि इन फर्जी योजनाओं में कुल 1855 मजदूरों को काम करते हुए दर्शाया गया है. पोर्टल के अनुसार ये मजदूर काम कर रहे हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि धरातल पर एक भी मजदूर कार्यरत नहीं है. इतना ही नहीं, योजनाबद्ध तरीके से 255 मस्टर रोल भरकर राशि निकासी का खेल जारी है. प्रखंड की 14 में से 12 पंचायतों में योजनाओं को ऑनगोइंग दिखाकर मस्टर रोल की मांग की जा रही है. आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि सबसे अधिक गड़बड़ी बाहाहारा पंचायत में है, जहां अकेले 895 मजदूरों को काम करते दिखाया गया है. 12 मार्च तक के कार्य दिवस के आधार पर इन सभी पंचायतों में मस्टर रोल जेनरेट किये गये हैं, जबकि मौके पर काम पूरी तरह ठप है. ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर किसकी शह पर पुराने तालाबों को दोबारा सक्रिय दिखाकर लाखों रुपये के मस्टर रोल भरे जा रहे हैं. डीडीसी के शोकॉज के बाद अब इस पूरे वित्तीय सिंडिकेट के खुलासे की उम्मीद बढ़ गयी है.

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By Akarsh Aniket

Akarsh Aniket is a contributor at Prabhat Khabar.

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