आजादी के दशकों बाद भी बघौता नदी पर पुल का इंतजार

जान जोखिम में डाल आवागमन को मजबूर हैं ग्रामीण

जान जोखिम में डाल आवागमन को मजबूर हैं ग्रामीण संदीप कुमार, केतार (गढ़वा) विकास के तमाम दावों के बीच केतार प्रखंड की ग्राम पंचायत परती कुश्वानी का बघौता टोला आज भी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. आदिवासी बहुल इस क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए बघौता नदी किसी बड़ी बाधा से कम नहीं है. दशकों पुरानी पुल की मांग आज भी फाइलों और आश्वासनों में दबी हुई है, जिसका खामियाजा यहां की बड़ी आबादी को भुगतना पड़ रहा है. स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि बघौता नदी पर पुल नहीं होने के कारण हर साल मानसून के दौरान उनका संपर्क जिला और प्रखंड मुख्यालय से पूरी तरह कट जाता है. नदी का जलस्तर बढ़ते ही आवागमन ठप हो जाता है. बारिश के मौसम में यहां के बच्चे को जान जोखिम में डालकर स्कूल जाने को मजबूर हो जाते हैं. मरीज समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाते हैं, जिससे उनकी स्थिति गंभीर हो जाती है. किसान के पास उपजाऊ जमीन होने के बावजूद किसान अपनी फसल बाजार तक नहीं पहुंचा पाते हैं. बघौता टोला के आदिवासियों का कहना है कि वे वर्षों से पुल निर्माण की गुहार लगा रहे हैं. बरसात के दिनों में जब नदी उफान पर होती है, तो कई दिनों तक लोग अपने घरों में कैद हो जाते हैं. ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि बिना पुल के इस आदिवासी क्षेत्र का समग्र विकास संभव नहीं है. विधायक अनंत प्रताप देव ने सदन में सरकार का ध्यान बघौता नदी की ओर आकर्षित करते हुए कहा कि यह क्षेत्र आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है. उन्होंने कहा कि जनहित को देखते हुए राज्य सरकार शीघ्र यहां पुल निर्माण की स्वीकृति प्रदान करे, ताकि स्थानीय लोगों को सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके.

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By Akarsh aniket

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