भवन के अभाव में गढ़वा का इकलौता कल्याण गुरुकुल बंद

भवन के अभाव में गढ़वा का इकलौता कल्याण गुरुकुल बंद

विजय सिंह, भवनाथपुर (गढ़वा) गढ़वा जिले के युवाओं को हुनरमंद बनाकर रोजगार से जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी योजना ‘कल्याण गुरुकुल’ प्रशासनिक उदासीनता और जर्जर भवन की भेंट चढ़ गयी है. भवनाथपुर प्रखंड के झगराखाड़ में संचालित जिले का एकमात्र कल्याण गुरुकुल अगस्त 2025 से पूरी तरह बंद हो गया है. इसके बंद होने से प्रशिक्षण ले रहे युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है. साथ ही जिले में बेरोजगारी और पलायन की समस्या फिर से बढ़ने की आशंका गहरा गयी है. वर्ष 2018 में तत्कालीन रघुवर दास सरकार ने राज्य के युवाओं को रोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से कल्याण विभाग और एनजीओ ‘पैन आइआिटी रिच फॉर झारखंड फाउंडेशन’ के माध्यम से इस गुरुकुल की शुरुआत की थी. मार्च 2018 से अगस्त 2025 तक इस केंद्र ने कई युवाओं को प्रशिक्षण देकर रोजगार उपलब्ध कराया. इस दौरान कुल 1644 युवाओं को सरिया मिस्त्री, सेंट्रिंग, मेसन और इलेक्ट्रिशियन जैसे ट्रेडों में प्रशिक्षित कर देश के विभिन्न राज्यों की प्रतिष्ठित कंपनियों में नौकरी दिलायी गयी. गुरुकुल का संचालन वर्ष 2004 में बने पुराने एसटी-एससी छात्रावास भवन में किया जा रहा था. लंबे समय तक कस्तूरबा विद्यालय चलने के बाद यह भवन गुरुकुल को सौंप दियमा गया था. समय के साथ भवन पूरी तरह जर्जर हो गया. प्रशिक्षण के दौरान कई बार छात्रों पर छत का प्लास्टर गिरने की घटनाएं भी हुईं, जिससे सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गये. एनजीओ ने कई बार कल्याण विभाग से भवन की मरम्मत या वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की. प्रस्ताव लंबित रहने के कारण नहीं हो सका मरम्मत कार्य तत्कालीन उपायुक्त शेखर जमुआर के निर्देश पर विभाग ने 86 लाख रुपये का प्राक्कलन तैयार कर रांची मुख्यालय भेजा, लेकिन प्रस्ताव लंबित रहने के कारण मरम्मत कार्य शुरू नहीं हो सका. आखिरकार सुरक्षा कारणों से एनजीओ ने गुरुकुल बंद करने का फैसला लिया. झगराखाड़ कल्याण गुरुकुल से प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं को रोजगार के साथ सामाजिक सुरक्षा भी दी जाती थी. सरकार की ओर से 2 लाख रुपये और संबंधित कंपनी की ओर से 5 लाख रुपये का बीमा कराया जाता था. आज यह रोजगार केंद्र पूरी तरह वीरान हो चुका है. क्या कहते हैं पदाधिकारी प्रशिक्षण अधिकारी ब्रजकिशोर ने कहा कि झगराखाड़ कल्याण गुरुकुल जिले के युवाओं के लिए उम्मीद की किरण थी. यहां से सैकड़ों युवा आत्मनिर्भर बने. भवन की जर्जर स्थिति और मरम्मत नहीं होने के कारण इसे बंद करना पड़ा. इससे अब स्थानीय युवाओं के सामने बेरोजगारी का संकट खड़ा हो गया है.

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By Akarsh Aniket

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पति की दूसरी शादी रुकवाने महिला थाने में लगायी गुहारपीड़िता ने ससुरला पक्ष पर प्रताड़ित करने भी लगाया आरोपप्रतिनिधि, गढ़वाबिहार के औरंगाबाद जिले की रहने वाली ममता कुमारी ने अपने पति की दूसरी शादी रुकवाने के लिए महिला थाना गढ़वा में आवेदन देकर न्याय की गुहार लगायी है. ममता का आरोप है कि उसका पति पहली पत्नी के रहते 14 मई को दूसरी शादी करने जा रहा है. पीड़िता ममता कुमारी ने बताया कि उसकी शादी 2 जुलाई 2021 को हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार गढ़वा थाना क्षेत्र के परिहारा गांव निवासी भोला चौहान के पुत्र राम चौहान के साथ हुई थी. ममता के अनुसार, उसके पिता कारु चौहान ने अपनी क्षमता के अनुसार शादी में करीब चार लाख रुपये नकद और लगभग दो लाख रुपये का सामान उपहार के रूप में दिया था. ममता का आरोप है कि शादी के कुछ दिनों बाद ही ससुराल पक्ष ने अतिरिक्त दहेज में एक लाख रुपये और पल्सर मोटरसाइकिल की मांग शुरू कर दी. मायके की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण यह मांग पूरी नहीं हो सकी. इसके बाद उसे प्रताड़ित किया जाने लगा. पीड़िता ने बताया कि उसका पति पंजाब में दुकान चलाता है और वहां उसे कमरे में बंद रखता था और खाना भी नहीं देता था. ममता ने यह भी आरोप लगाया कि गर्भवती होने पर दो बार जबरन दवा खिलाकर उसका गर्भपात कराया गया. ममता ने बताया कि उसने वैवाहिक जीवन बचाने की काफी कोशिश की, लेकिन प्रताड़ना लगातार बढ़ती गयी. आरोप है कि 25 नवंबर 2025 को ससुराल वालों ने मारपीट कर उसे घर से निकाल दिया और उसके कपड़े व गहने भी रख लिये. तब से वह अपने मायके में रह रही है.रिश्तेदारों के घर कार्ड पहुंचने पर हुई दूसरी शादी की जानकारीममता ने थाना में दिये आवेदन में बताया कि उसे पति की दूसरी शादी की जानकारी तब हुई, जब उसके देवर ने डंडई थाना क्षेत्र के महूदंड स्थित रिश्तेदारों के यहां शादी का कार्ड पहुंचाया. इसके बाद वह अपने माता-पिता के साथ गढ़वा पहुंची और महिला थाना में आवेदन देकर पति की दूसरी शादी रुकवाने की मांग की है.