मेराल से संजय तिवारी की रिपोर्ट
Abua Awas Corruption: झारखंड के गढ़वा जिले के मेराल प्रखंड के गोन्दा पंचायत में सरकारी योजनाओं में मची लूट का जिला प्रशासन ने भंडाफोड़ किया है. उप विकास आयुक्त पशुपतिनाथ मिश्रा की जांच में अबुआ आवास और मनरेगा में भारी अनियमितताएं पाई गई हैं. इस मामले में वर्तमान बीडीसी और बिचौलियों पर प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया गया है. इस आदेश के बाद मेराल थाना में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई.
बीडीसी पर रिश्वत लेने का आरोप
लाभुक सुनीता देवी ने बीडीसी कृष्ण देव प्रजापति पर अबुआ आवास के लिए 20,000 रुपये रिश्वत लेने का आरोप लगाया. ज्वाला प्रसाद नामक बिचौलिये ने लाभुकों से 5,000 से लेकर 40,000 रुपये तक की अवैध वसूली की.
मानकों की अनदेखी पर जुर्माना
उप विकास आयुक्त के आदेश के बाद लातदाग गांव में बिना सूचना पट्ट के डोभा निर्माण और मानकों की अनदेखी पर मुखिया और कर्मियों पर जुर्माना लगाया गया है. इसके साथ ही 23 डिफाल्टर लाभुकों पर सरकारी राशि की वसूली के लिए नीलाम पत्र (सर्टिफिकेट केस) चलाने की तैयारी की जा रही है.
अबुआ आवास के लाभुकों ने दिया लिखित बयान
जांच के दौरान डीडीसी पशुपतिनाथ मिश्रा के सामने लाभुकों ने लिखित बयान देकर भ्रष्टाचार की पोल खोल दी. लाभुक सरोजा देवी और रूबी देवी ने बताया कि कैसे उनसे आवास के नाम पर मोटी रकम वसूली गई. प्रशासन ने इसे गंभीर मामला मानते हुए मेराल थाना को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है. मनरेगा कार्यों में लापरवाही बरतने पर डीडीसी ने कड़ा रुख अपनाया है. कार्यस्थल पर साइन बोर्ड नहीं होने पर संबंधित मुखिया, पंचायत सचिव और ग्राम रोजगार सेवक पर प्रति व्यक्ति 500-500 रुपये का आर्थिक दंड लगाया गया है.
क्या कहते हैं पदाधिकारी
मेराल के बीडीओ सह अंचल पदाधिकारी यशवंत नायक ने कहा कि डीडीसी के निर्देश पर मेराल थाने में बीडीसी कृष्ण देव प्रजापति और बिचौलिये ज्वाला प्रसाद के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने हेतु लिखित आवेदन दे दिया गया है. भ्रष्टाचार में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा.
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थाने में मामला दर्ज, एसआई हरिशंकर ओझा करेंगे जांच
इधर, मामले को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई तेज हो गई है. मेराल थाना प्रभारी विष्णु कांत ने बताया कि अंचल अधिकारी सह बीडीओ यशवंत नायक से प्राप्त आवेदन के आधार पर मेराल थाना कांड संख्या- 56/26 दर्ज कर लिया गया है. यह प्राथमिकी भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 316(2) और 318(4) के तहत दर्ज की गई है. थाना प्रभारी ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआई हरिशंकर ओझा को केस का अनुसंधान (जांच) सौंप दिया गया है. पुलिस अब बिचौलियों और जनप्रतिनिधियों की संलिप्तता की गहन जांच कर साक्ष्य जुटाने में लग गई है.
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