भाजपा ने किया डॉ भीमराव अंबेडकर सम्मान कार्यक्रम का आयोजन

भाजपा जिला कार्यालय गढ़वा में गुरुवार को डॉ भीमराव अंबेडकर सम्मान कार्यक्रम को लेकर संगोष्ठी का आयोजन किया गया.

भाजपा ही एकमात्र पार्टी है, जो सभी वर्गों को सम्मान देती है : किशुन दास गढ़वा. भाजपा जिला कार्यालय गढ़वा में गुरुवार को डॉ भीमराव अंबेडकर सम्मान कार्यक्रम को लेकर संगोष्ठी का आयोजन किया गया. भाजपा एससी मोर्चा के जिलाध्यक्ष लक्ष्मण राम की अध्यक्षता में आयोजित इस संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में विचार व्यक्त करते हुए भाजपा एससी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सह सिमरिया के पूर्व विधायक किशुन दास ने कहा कि भाजपा एक मात्र ऐसी पार्टी है, जो हर जाति वर्ग को सम्मान देते आयी है. जबकि कांग्रेस, झामुमो व राजद जैसे दलों सहित अन्य पार्टियों ने बाबा भीमराव आंबेडकर के नाम पर सिर्फ वोट की राजनीति कर जनता को बरगलाने का काम किया है. भारत में संविधान बचाओ का नारा देकर महागठबंधन के नेताओं ने अपना विकास करने का काम किया है. जबकि भाजपा ने बाबा भीमराव अंबेडकर को हर जगह सम्मान देने का काम किया है. भाजपा जिलाध्यक्ष ठाकुर प्रसाद महतो ने कहा कि भाजपा ही एक मात्र ऐसा पार्टी है, जो अन्त्योदय को लेकर काम करती है. समाज के अंतिम पंक्ति में खड़ा व्यक्ति का विकास ही भारत का विकास है. इसी सोच के साथ भाजपा हर समाज के उत्थान करने में लगी हुई है. भाजपा जिला प्रभारी बिपिन बिहारी सिंह ने कहा कि भाजपा ने संविधान निर्माता बाबा भीमराव अंबेडकर के बनाए संविधान को मानते हुए देश में ऐतिहासिक विकास करने का काम किया है. पूर्व सांसद घुरन राम ने कहा कि भाजपा ने संविधान की रक्षा करने का काम किया है. जबकि दूसरे दलों के लोगों ने दलित समाज को बरगलाने का काम किया है. एससी मोर्चा के प्रदेश महामंत्री प्रभात भुईयां ने कहा कि भाजपा ने बाबा भीमराव अंबेडकर के बनाए संविधान के आधार पर लगातार काम किया है. लेकिन कांग्रेस, झामुमो, राजद आदि महागठबंधन के नेताओं ने राजनीतिक लाभ लेने के लिए बाबा भीमराव आंबेडकर के नाम पर समाज को तोड़ने का प्रयास किया है. उन्होंने कहा कि जनता अब समझ चुकी है कि भाजपा ही एक मात्र ऐसा पार्टी है, जो सबका साथ-सबका विकास के साथ लगातार देश के उत्थान में लगी हुई है. कार्यक्रम में विधायक प्रतिनिधि विवेकानंद तिवारी, वरिष्ठ भाजपा नेता विनय चौबे, डॉ पातंजलि केसरी, जिला उपाध्यक्ष मधुलता कुमारी, महामंत्री ओमप्रकाश गुप्ता, धनंजय गौड़, जिप सदस्य मोहन पासवान, एससी मोर्चा महामंत्री सुरेन्द्र राम, भाजयुमो जिलाध्यक्ष रामशीष तिवारी, किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष उदय कुशवाहा, महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष अनीता गुप्ता, ओबीसी मोर्चा जिलाध्यक्ष मनीष गुप्ता, अलख निरंजन, जितेन्द्र चंद्रवंशी, कंचन रवि, शुभम गुप्ता, सोनु गुप्ता सहित अन्य कई कार्यकर्ता उपस्थित थे.

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By VIKASH NATH

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नगर निकाय चुनाव में नहीं चला विधानसभा का गणितगढ़वा नगर परिषद चुनाव में भाजपा, झामुमो, कांग्रेस व राजद को उम्मीद से कम मिले मत- अध्यक्ष पद पर निर्दलीय प्रत्याशी की जीत ने चौंकाया- पिछले मत प्रतिशत को बरकरार नहीं रख सके बड़े दलपीयूष तिवारी, गढ़वागढ़वा नगर परिषद चुनाव संपन्न होने के बाद प्रत्याशियों को मिले मतों और उनके जीत-हार के समीकरणों की चर्चा शहर के नुक्कड़ों और चौक-चौराहों पर तेज हो गयी है. बिना किसी दल और बड़े नेताओं के समर्थन के दौलत सोनी की अध्यक्ष पद पर जीत ने सभी को चौंका दिया है. इस चुनाव में झामुमो, कांग्रेस, राजद और भाजपा जैसे बड़े दलों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी थी. लेकिन परिणामों ने इन दलों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. करीब 15 महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव में इन दलों को जो मत मिले थे, उन्हें वे अपने समर्थित प्रत्याशियों के माध्यम से बरकरार नहीं रख सके. सबसे खराब स्थिति भाजपा की रही है. विधानसभा चुनाव 2024 में भाजपा शहर के 33 बूथों में से 30 बूथों पर पहले स्थान पर रही थी. शहरी क्षेत्र से पार्टी को 15 हजार से अधिक मत प्राप्त हुए थे. इसके विपरीत नगर निकाय चुनाव में भाजपा के अध्यक्ष पद की प्रत्याशी कंचन जायसवाल को मात्र 2582 मत मिले. यदि भाजपा के बागी प्रत्याशी अलखनाथ पांडेय को मिले 2701 मत भी जोड़ दिये जाएं, तो कुल आंकड़ा लगभग 5300 तक ही पहुंचता है. यह संख्या विधानसभा चुनाव में मिले मतों की तुलना में काफी कम है.पिछले निकाय चुनाव के मत भी नहीं बचा सकी भाजपावर्ष 2018 के नगर निकाय चुनाव में अलखनाथ पांडेय की पत्नी मीरा पांडेय ने भाजपा के टिकट पर उपाध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा था. उन्हें 6899 मत मिले थे. वहीं निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उपाध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ने वाले विनोद जायसवाल (2026 में भाजपा समर्थित प्रत्याशी कंचन जायसवाल के पति) को 3810 मत प्राप्त हुए थे. वर्तमान चुनाव में ये दोनों ही परिवार अपने पुराने प्रदर्शन को दोहरा नहीं सके. न तो विधानसभा चुनाव में मिले मतों को बरकरार रख पाये और न ही पिछले निकाय चुनाव के आंकड़े तक पहुंच सके.झामुमो और कांग्रेस का गठजोड़ भी नहीं दिला सका जीतगढ़वा नगर परिषद चुनाव में झामुमो ने संतोष केसरी को अपना समर्थित प्रत्याशी बनाया था. कांग्रेस ने भी उन्हें समर्थन दिया. दो बड़े दलों के समर्थन के बावजूद संतोष केसरी को मात्र 3790 मत प्राप्त हुए. वर्ष 2018 के निकाय चुनाव में महिला आरक्षित सीट होने के कारण संतोष केसरी की पत्नी पिंकी केसरी अध्यक्ष पद की प्रत्याशी थीं. तब उन्हें 6411 मत मिले थे और वे भाजपा प्रत्याशी थीं. उसी चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी कमर सफदर को केवल 420 मत प्राप्त हुए थे. दोनों दलों को उम्मीद थी कि संयुक्त रूप से वे करीब सात हजार मत प्राप्त कर संतोष केसरी को जीत दिला देंगे. लेकिन यह रणनीति सफल नहीं हो सकी.54 मतों से हारने वाली अनिता दत्ता को इस बार केवल 215 मतवर्ष 2018 के नगर परिषद चुनाव में झामुमो की प्रत्याशी अनिता दत्ता को 6357 मत मिले थे. वे मात्र 54 मतों के अंतर से पिंकी केसरी से हार गयी थीं. इस बार अनिता दत्ता को किसी दल का समर्थन नहीं मिला और वे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरीं. लेकिन उन्हें केवल 215 मतों से ही संतोष करना पड़ा.राजद भी पिछला प्रदर्शन दोहराने में विफलनगर परिषद चुनाव 2026 में राजद ने विकास माली को समर्थन दिया. विकास माली को 1222 मत प्राप्त हुए. जबकि वर्ष 2018 के चुनाव में राजद समर्थित प्रत्याशी मनिका नारायण को 5117 मत मिले थे. वहीं उपाध्यक्ष पद के लिए राजद प्रत्याशी मो शमीम को 2018 में 3728 मत प्राप्त हुए थे. कुल मिलाकर नगर परिषद चुनाव के नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस बार मतदाताओं ने दलों की बजाय प्रत्याशियों को प्राथमिकता दी. बड़े दलों की रणनीति और पुराने मत प्रतिशत इस चुनाव में कारगर साबित नहीं हुए.

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