भवनाथपुर में शिक्षकों की भारी कमी, 14 हजार विद्यार्थियों पर सिर्फ 191 शिक्षक

भवनाथपुर प्रखंड में सरकारी शिक्षा व्यवस्था चरमरा रही है. शिक्षकों की भारी कमी के कारण लगभग 14 हजार छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. जानें इस गंभीर मुद्दे के पीछे की वजहें और समाधान के सुझाव.

भवनाथपुर, गढ़वा : भवनाथपुर प्रखंड में सरकारी शिक्षा व्यवस्था को सुधार की दरकार है. शिक्षा किसी भी क्षेत्र के विकास की बुनियाद मानी जाती है, लेकिन प्रखंड में शिक्षकों की कमी समेत कई चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं. प्रखंड की नौ पंचायतों में जमा उच्च विद्यालय भवनाथपुर, झगराखाड़ और कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय समेत कुल 61 विद्यालय हैं. इन विद्यालयों में करीब 14 हजार छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं.

सबसे बड़ी समस्या कई विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को लेकर सामने आ रही है. प्रखंड मुख्यालय स्थित राजकीयकृत प्लस टू उच्च विद्यालय में वर्ष 2026 में कक्षा नौवीं से 12वीं तक करीब 1215 विद्यार्थी नामांकित हैं, जबकि शिक्षकों की संख्या 16 है. कक्षा नौवीं से 12वीं तक अंग्रेजी के शिक्षक नहीं हैं. ऐसे में विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है.

वहीं, परियोजना बालिका उच्च विद्यालय में 555 छात्राओं पर मात्र चार शिक्षक हैं. जमा उच्च विद्यालय झगराखाड़ में 677 विद्यार्थियों पर आठ शिक्षक हैं, जबकि कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय में 393 छात्राओं पर चार शिक्षिकाएं हैं. इनमें एक स्थायी और तीन पार्ट टाइम शिक्षिकाएं हैं.

14 हजार विद्यार्थियों के लिए 191 शिक्षक

भवनाथपुर प्रखंड में करीब 14 हजार छात्र-छात्राओं को पढ़ाने के लिए लगभग 350 शिक्षकों की आवश्यकता बतायी जा रही है, जबकि वर्तमान में 191 शिक्षक कार्यरत हैं. शिक्षा विभाग के अनुसार 40 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक होना जरूरी है. इस लिहाज से प्रखंड में 159 और शिक्षकों की आवश्यकता है. विद्यार्थियों ने भी शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई प्रभावित होने की शिकायत की है.

प्रखंड में शिक्षा व्यवस्था को लेकर केवल शिक्षकों की उपलब्धता ही चुनौती नहीं है. ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों में नियमित पठन-पाठन, विषयवार शिक्षकों की उपलब्धता, विद्यालय भवन, डिजिटल संसाधन, पुस्तकालय, पेयजल, शौचालय और विद्यार्थियों की उपस्थिति जैसे मुद्दों पर भी लगातार निगरानी की जरूरत है. वहीं, कुछ विद्यालय बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं.

भवनाथपुर में सरकारी विद्यालयों के साथ निजी शिक्षण संस्थानों की ओर भी अभिभावकों का रुझान बढ़ रहा है. डीएवी जैसे संस्थान शैक्षणिक गतिविधियों के साथ अभिभावक-शिक्षक संवाद पर भी जोर दे रहे हैं.

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए क्या जरूरी?

स्थानीय स्तर पर शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए विद्यालयों में विषयवार शिक्षकों की पर्याप्त नियुक्ति, नियमित निरीक्षण, शिक्षकों की उपस्थिति की निगरानी, कमजोर विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त कक्षाएं और विद्यालयों में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल जरूरी है. साथ ही अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन समितियों की भागीदारी बढ़ाने की भी आवश्यकता है.

विद्यालयों में अनुशासन और बच्चों के साथ व्यवहार को लेकर भी विशेष संवेदनशीलता जरूरी है. एक सप्ताह पूर्व एनपीएस बसेरिया लेवा विद्यालय में एक छात्र द्वारा दोबारा सब्जी मांगने पर रसोईया द्वारा पांचवीं कक्षा के छात्र को छोलनी से मारकर घायल करने का मामला सामने आया था. वहीं, करीब एक वर्ष पूर्व बेलपहाड़ी विद्यालय में बच्चों के साथ अनुचित व्यवहार का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक कार्रवाई की खबर भी सामने आयी थी.

जनता का सवाल—कब दूर होगी शिक्षकों की कमी?

भवनाथपुर के अभिभावकों और विद्यार्थियों का सवाल है कि जब सरकार शिक्षा को प्राथमिकता देने की बात कर रही है, तो विद्यालयों में विषयवार शिक्षकों की कमी कब दूर होगी? ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को भी शहरों जैसी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कब मिलेगी?

शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सिर्फ भवन और नामांकन पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि पर्याप्त शिक्षक, नियमित पढ़ाई और बेहतर शैक्षणिक वातावरण भी जरूरी है. विभाग यदि इन बुनियादी कमियों पर गंभीरता से काम करे तो भवनाथपुर के सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले हजारों विद्यार्थियों के भविष्य को बेहतर दिशा मिल सकती है.


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By शुभम राय

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