गढ़वा. झारखंड राज्य का बजट तीन मार्च को पेश किया जायेगा. बजट को लेकर प्रभात खबर द्वारा गढ़वा जिला मुख्यालय में पेंशनर समाज के बीच एक परिचर्चा का आयोजन किया गया. इसमें सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने अपनी राय रखते हुए बजट में पेंशनरों के लिए क्या प्रावधान होने चाहिए, इस पर अपनी बात रखी. परिचर्चा में मौजूद सभी पेंशनरों ने कहा कि राज्य सरकार को बजट में पेंशनर्स की सुविधाओं और हितों का विशेष ध्यान रखना चाहिए. ताकि जितने वर्षों तक उन्होंने सेवा दी है, इसके बदले उन्हें भी सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन मिल सके. प्रस्तुत है जितेंद्र सिंह की यह रिपोर्ट. पेंशनर के लिए विशेष स्वास्थ्य बीमा योजना हो : अशर्फी राम बजट पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अशर्फी राम ने कहा कि सेवानिवृत्त जीवन में बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं के मद्देनज़र बजट में स्वास्थ्य सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए.उन्होंने कहा कि सरकार को पेंशनर समाज के लिए विशेष स्वास्थ्य बीमा योजना और निःशुल्क जांच सुविधाएं सुनिश्चित करना चाहिए. यदि बजट में इन पहलुओं को शामिल किया गया, तो बुजुर्गों की चिकित्सा सहायता में सुधार होगा और उनके उपचार के खर्च का बोझ काफी हद तक कम किया जा सकेगा. महंगाई भत्ता नियमित रूपं से बढ़े : केके यादव सेवानिवृत कर्मचारी केके यादव ने बजट में पेंशन की स्थिरता और आर्थिक सुरक्षा को जरूरी बताया. उन्होंने कहा कि पेंशन ही हमारे जीवन का मुख्य आधार है. बजट में महंगाई भत्ते को स्वतः जोड़ा जाये, ताकि हर वर्ष बढ़ती महंगाई का बोझ हमारे ऊपर न पड़े. उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि बजट में पेंशन वृद्धि की एक स्थायी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे सेवानिवृत्त लोगों को आर्थिक संकट से बचाया जा सके. पुरानी पेंशन योजना पुन: सक्रिय हो : श्याम बिहारी राम श्याम बिहारी राम ने वर्तमान पेंशन योजना की सीमाओं पर सवाल उठाते हुए पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को पुन: सक्रिय करने की मांग सरकार से की. उन्होंने कहा कि नयी पेंशन योजना में भविष्य की सुरक्षा और आपातकालीन परिस्थितियों में सहारे की कमी है. हम सरकार से आग्रह करते हैं कि ओपीएस जैसी विश्वसनीय योजना फिर से लागू की जाये. उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्त जीवन में पूर्वानुमानित सुरक्षा और आर्थिक सहारा अत्यंत आवश्यक है. पेंशनर कल्याण कोष की स्थापना हो : श्रवण कुमार श्रवण कुमार ने बजट में एक विशेष पेंशनर कल्याण कोष के गठन की मांग रखी. कहा कि आपातकालीन परिस्थितियों में पेंशनरों को आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए एक विशेष कोष होना चाहिए. कोरोना जैसी विपरीत परिस्थितियों में इस सहायता की आवश्यकता अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है. इस कोष से न केवल आर्थिक संकट से बचाव होगा, बल्कि पेंशनरों का आत्मविश्वास भी बढ़ेगा. अनुभव का सदुपयोग हो और सलाहकार समितियां बने : बृजनंदन प्रसाद बृजनंदन प्रसाद ने कहा कि पेंशनर समाज की वर्षों की सेवा और अनुभव को सरकार को नजरअंदाज़ नहीं करना चाहिए. उन्होंने सुझाव दिया कि बजट में ऐसा प्रावधान हो कि पेंशनरों को विभिन्न सरकारी विकास और निगरानी समितियों में सलाहकार के रूप में शामिल किया जाये. इससे न केवल उनके अनुभव का सदुपयोग होगा, बल्कि उन्हें सम्मानजनक भूमिका भी मिलेगी. उन्होंने कहा कि पेंशनरों का अनुभव नीति निर्माण में एक महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है. जिला स्तर पर एक हेल्प डेस्क बने : कृष्णा प्रसाद कृष्णा प्रसाद ने कहा कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों के अनुभवों का लाभ समाज और सरकार दोनों को लेना चाहिए. बजट में ऐसा प्रावधान हो, जिससे पेंशनर्स को सरकारी सलाहकार समितियों में शामिल करने की व्यवस्था हो. इससे उनकी योग्यता और अनुभव का बेहतर उपयोग हो सकेगा.उन्होंने कहा कि कई बार पेंशन से संबंधित छोटी-मोटी समस्याओं को सुलझाने के लिए हमें बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है. एक हेल्प डेस्क होने से हमारी समस्याओं का समाधान जल्द और सहजता से हो सकेगा. इसे डेस्क को एक नियोजित सिस्टम के तहत चलाया जाये.
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