उपायुक्त के हस्तक्षेप के बाद मंगलवार की संध्या चार बजे अंत्यपरीक्षण के बाद एंबुलेंस से शव को भेजा गया घर
गढ़वा : चिकित्सकों व सदर अस्पतालकर्मियों की अफसरशाही की वजह से भवनाथपुर के शिवपुर की मंति कुंवर को अपनी बेटी के शव का अंत्यपरीक्षण कराने व शव को घर ले जाने के लिए 15 घंटे तक अधिकारियों की आरजू व मिन्नतें करने पड़ी़ किसी का दिल नहीं पिघलने पर वह अपना दर्द लेकर उपायुक्त के जनता दरबार में गयी, जहां से सूचना मिलने पर उपायुक्त के कड़े निर्देश के बाद शव का अंत्यपरीक्षण किया गया और अंतिम संस्कार के लिए एंबुलेंस के माध्यम से शव उसके घर भेजा गया़ समाचार के अनुसार सोमवार की शाम में खाना खाने के बाद मंति की पुत्री कविता देवी की हालत काफी खराब हो गयी थी़
मंति ने उसे इलाज के लिए पहले भवनाथपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भरती कराया, जहां से रेफर किये जाने के बाद नगरउंटारी अनुमंडलीय अस्पताल लाया गया, लेकिन वहां से भी चिकित्सकों ने उसे जवाब देते हुए सदर अस्पताल गढ़वा जाने को कहा़ मंति कुंवर ने बताया कि उसके पास सिर्फ चार सौ रुपये थे, जो उसने जंगलों से तुलसी पौधा काटकर व उसका बीज बेच कर जमा किया था.
गढ़वा सदर अस्पताल आते-आते यह पैसे उसके भाड़े में ही खत्म हो गये़ गढ़वा सदर अस्पताल में भरती कराने के एक घंटे के बाद रात करीब 12 बजे उसकी पुत्री की मौत हो गयी़
भटकती रही, पर चिकित्सकों ने मदद नहीं की
कविता देवी की मौत को संदेहास्पद मानते हुए अंत्यपरीक्षण कराने के लिए चिकित्सकों ने लिखा़ तब से लेकर मंगलवार को अपराह्न दो बजे तक वह पुत्री के शव को लावारिश हालत में छोड़ चिकित्सकों व कर्मियों के पास भूखी-प्यासी भटकती रही़ उसके साथ कोई पुरुष सदस्य नहीं था़
उसकी पुत्री का शव अंत्यपरीक्षण में पड़ा रहा़ जब उसने सिविल सर्जन से बात की, तो वहां से कहा गया कि पहले शव को घर तक ले जाने के लिए भाड़े का इंतजाम करो, इसके बाद ही अंत्यपरीक्षण किया जायेगा़ पास में एक रुपये भी नहीं होने के कारण वह अस्पताल परिसर में भटक रही थी, इसी दौरान सामाजिक कार्यकर्ता गौतम ऋषि ने उसे उपायुक्त से मिलने की सलाह दी़
उपायुक्त से मिलने पर चिकित्सकों को कड़ी फटकार लगी और तीन बजे शव का अंत्यपरीक्षण शुरू किया गया़ संध्या चार बजे बेटी के शव को एंबुलेंस के माध्यम से उसके घर भेजा गया़ मंति ने बताया कि चिकित्सकों व कर्मियों में दया नाम की चीज नहीं है़ इधर इस संबंध में जब सिविल सर्जन टी हेंब्रम से बात करने की कोशिश की गयी, तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया़ प्रभारी सिविल सर्जन बी रजक ने कहा कि वे अभी जिला मुख्यालय से बाहर हैं, उनके संज्ञान में इस तरह की कोई घटना नहीं है़ उन्होंने कहा कि अस्पताल में शव को घर तक भेजने के लिए कोई संसाधन व राशि उपलब्ध नहीं है़
