ठंड में भी बिना चप्पल व गरम कपड़े के पांच किमी चल कर शहर आते हैं बच्चे
भवनाथपुर : सुबह के छह बज रहे हैं. काफी ठंडा मौसम है. भूमि भी काफी ठंडा है़ लेकिन बिना चप्पल, जूते व गरम कपड़े के आदिम जनजाति परिवार के छोटे-छोटे बच्चे अपने हाथों में दातून की गठरी व साइकिल पर लकड़ी लिए टाउनशिप पहुंचे हुए हैं. ये दातून व लकड़ी को बेचने के लिए ग्राहक का इंतजार कर रहे थे़
इनसे बातचीत करने पर इन्होंने बताया कि ये दातून और लकड़ी बेच कर जो पैसे कमायेंगे, उसी से घर का राशन खरीदेंगे़ पढ़ाई के विषय में पूछने पर उन्होंने बताया कि वे सभी मवि झूरही में नाम लिखाये हैं. इसमें राम निवास कोरवा कक्षा पांच, नगीना व जितेंद्र कक्षा एक, विनोद, साधु, रोहित व कमलेश कक्षा दो का छात्र है. उनसे पूछने पर वे बताते हैं कि घर चलाने के लिए दातून बेचने व लकड़ी को शहर तक पहुंचाने में माता-पिता का सहयोग करना पड़ता है़ ये सभी बच्चे नंगे पांव चार बजे भोर में ही दातून व लकड़ी लेकर घर से निकले हुए थे़ घर से ये पांच किमी घने जंगल का रास्ता तय करते हुए यहां पहुंचे हुए थे़ बच्चों ने बताया कि दातून अथवा लकड़ी बेचने से जो भी पैसे मिलते हैं, वे अपने मां-पिताजी को दे देते हैं.
यह जानकारी लेने पर कि वे जिस विद्यालय में पढ़ते हैं, वहां उन्हें मध्याह्न भोजन मिलता है कि नहीं तो उन्होंने कहा कि पहले उन्हें मध्याह्न भोजन मिलता था़ लेकिन इधर बहुत दिन से बंद है़ इस दौरान बच्चों की स्थिति पर तरस खाकर वहां उपस्थित विरेंद्र सिंह नेपाली नामक व्यक्ति ने उन्हें जलेबी खिलाया़ साथ ही उन्हें पढ़ने की नसीहत दी़ लेकिन बताते चलें कि आदिम जनजाति परिवार के इन बच्चों का यह लगभग नियमित दिनचर्या है़
