तीन साल से काम नइखे चलत

स्थानीय मजदूरों को 100 दिन का भी नहीं मिल रहा है काम रंका(गढ़वा) : मनरेगा के तहत अकुशल मजदूरों को 100 दिन रोजगार की गारंटी देने की योजना सिर्फ कागजी साबित हो रही है. मजदूरों को न तो 100 दिन रोजगार मिल रहा है और न ही रोजगार भत्ता, जिसके कारण इलाके के मजदूर पहले […]

स्थानीय मजदूरों को 100 दिन का भी नहीं मिल रहा है काम

रंका(गढ़वा) : मनरेगा के तहत अकुशल मजदूरों को 100 दिन रोजगार की गारंटी देने की योजना सिर्फ कागजी साबित हो रही है. मजदूरों को तो 100 दिन रोजगार मिल रहा है और ही रोजगार भत्ता, जिसके कारण इलाके के मजदूर पहले की तरह काम के लिए बाहर पलायन को मजबूर हो रहे हैं.

रंका अनुमंडल के रमकंडा प्रखंड के सुली गांव से हो रहा मजदूरों का पलायन इसके उदाहरण के रूप में देखा जा सकता है. महिला मजदूर फूलकुमारी देवी, रिंकी देवी, चिंता देवी, अनिता कुमारी, गौरी देवी, समुद्री देवी, फगुनी देवी आदि ने बताया कि गांव में तीन साल से कोई काम नइखे चलत. कहीं खेत में काम नइखे.

भूखे मरे के नौबत बा. मजदूरों ने यह भी बताया कि मनरेगा से काम चलता भी है, तो उसकी मजदूरी कब मिलेगी, निश्चित नहीं रहता हे. उनका कहना है कि मनरेगा आने से रोजगार की गारंटी मिल गया है, लेकिन मजदूरी भुगतान की गारंटी नहीं मिली है. काम करने के कम से कम एक महीने के बाद ही मजदूरी का भुगतान होता है. इसके कारण काम करने के बाद भी भूखे मरने की नौबत होती है. इसके कारण वे सब पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ के राजपुर जा रहे हैं.

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