गढ़वा : धनुष तोड़ने का मतलब अहंकार को तोड़ना है. श्रीराम ने धनुष तोड़ कर अहंकार को तोड़ा था. यह बात चिनिया रोड स्थित मां दुर्गा पूजा समिति के पंडाल में रामकथा कहते हुए पंडित श्यामनारायण शास्त्री ने कही. श्री शास्त्री ने कहा कि आज गांव–गांव एवं हर शहर में एक धनुष का नाम है.
दहेजरूपी यह धनुष काफी खतरनाक हो गया है. इसे तोड़ना आज के नौजवानों के हाथ में है. श्री शास्त्री ने कहा कि यदि युवा आगे आते हैं, तो इस धनुष को आसानी से तोड़ा जा सकता है. शास्त्रीजी ने कहा कि भगवान राम ने विश्वामित्र के कहने पर धनुष को तोड़ा, लेकिन विवाह के लिए उन्होंने अपने माता–पिता से आज्ञा लेने की बात कही.
लेकिन आज के युवा तो माता–पिता से आज्ञा लेना तो दूर, उन्हें जाने बगैर शादी कर ले रहे हैं. उन्होंने कहा कि राम के पदचिह्नें पर चलनेवाले लोग आदर्श होते हैं, उन्हीं की पूजा होती है. श्रीराम अपने कर्म बल पर मर्यादा पुरुषोत्तम बने. आज के मनुष्य को इससे प्रेरणा लेने की जरूरत है.
