गढ़वा : कृषि विज्ञान केंद्र गढ़वा व जिला कृषि विभाग के पदाधिकारियों ने मेराल प्रखंड के गोंदा गांव में पहुंच कर वहां किसानों द्वारा लगायी गयी फसल का निरीक्षण किया. टीम में कृषि विज्ञान केंद्र के कार्यक्रम समन्वयक डॉ देवकांत प्रसाद व जिला कृषि पदाधिकारी सह परियोजना निदेशक अरुण कुमार शामिल थे.
उन्होंने किसानों के अरहर, मक्का, तिल एवं बादाम के फसल में लगे रोग एवं कीटाणु की रोकथाम की जानकारी दी. पदाधिकारियों ने कहा कि इस समय मक्का के पौधे में तनाछेदक कीड़े का प्रकोप बहुत बढ़ गया है. इसकी रोकथाम के लिये फोरेट 10जी या काबरेफ्यूरॉन 3जी दानेदार कीटनाशी का व्यवहार पत्तियों के ऊपर चक्र में करने को कहा. उन्होंने कहा कि पत्तियों की ऊपरी चक्र में आठ–दस दाना डालने से इसकी रोकथाम की जा सकती है. या आवश्यकता पड़ने पर मोनोप्रोटोफाल का घोल बना कर छिड़काव करने की बात बतायी.
इसी तरह से उन्होंने मूंगफली के पौधे में भूरा पिल्लू के प्रकोप होने पर डायक्लोरभास 0.5 मिली प्रति लीटर पानी में घोल बना कर छिड़काव करने का सुझाव दिया. उन्होंने किसानों को कहा कि उपरवाली जमीन में जिसमें अभी तक फसल नहीं लगायी गयी है, उसमें कम अवधि के मक्का व अरहर की फसल लगाने की सलाह दी.
परियोजना निदेशक ने किसानों को अरहर के साथ मक्का, तिल, बादाम की मिश्रित खेती करने व डोलोमाइट का प्रयोग करने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि डोलोमाइट का प्रयोग होने से मिट्टीजनित रोग व दीमक का प्रयोग काफी कम हो जाता है. इस अवसर पर गोंदा के किसान शिवनाथ कुशवाहा, मिथिलेश ठाकुर आदि उपस्थित थे
