मझिआंव बीडीओ पर आपराधिक मामला दर्ज करने की अनुशंसा
मनरेगा लोकपाल ने की कार्रवाई की अनुशंसा
गढ़वा : मनरेगा लोकपाल की ओर से जिले के दो प्रखंड विकास पदाधिकारियों पर कार्रवाई की अनुशंसा की गयी है. इनमें नगरउंटारी के बीडीओ पर समय पर जांच रिपोर्ट समर्पित नहीं करने को लेकर 1000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है. वहीं मङिाआंव बीडीओ पर भ्रष्टाचार में संलिप्तता का आरोप लगा कर आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की अनुशंसा की गयी है.
समाचार के अनुसार मङिाआंव प्रखंड के सकरकोनी गांव निवासी रकीबुद्दीन खान के आवेदन पर कार्रवाई करते हुए लोकपाल मुरारी झा ने एक अगस्त 2014 को सात दिनों के अंदर करमडीह मुख्य पथ से श्यामलाल के घर होते हुए ईदगाह तक मिट्टी मोरम पथ निर्माण कार्य की जांच कर रिपोर्ट समर्पित करने के निर्देश दिये थे. लेकिन इसे नजरअंदाज कर दिया गया. पुन: 28 अगस्त को स्मार पत्र लिख कर जांच करने को कहा गया. लेकिन इस बार भी समय सीमा के अंदर रिपोर्ट नहीं भेजी गयी. लोकपाल की ओर से इस अवहेलना को भ्रष्टाचार में संलिप्त करार देते हुए उपायुक्त को मनरेगा अधिनियम 23(6) के तहत बीडीओ पर आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की अनुशंसा की गयी है. वहीं नगरऊंटारी बीडीओ के मामले में बताया गया कि बंबा गांव के फिरोज आलम ने कब्रिस्तान से पक्की सड़क तक मिट्टी मोरम पथ में अनियमितता का आरोप लगाया था. आवेदन में कहा गया था कि जेसीबी से मिट्टी काट कर ट्रैक्टर से ढुलाई की जा रही है.
इस आवेदन के आलोक में पांच जुलाई को सात दिन के अंदर बीडीओ से जांच रिपोर्ट मांगी गयी थी. लेकिन जांच नहीं करने पर पुन: 21 अगस्त को स्मार पत्र भेजा गया. स्मार पत्र के बाद यद्यपि बीडीओ ने जांच कर आरोप को गलत बताया है. लेकिन मनरेगा अधिनियम के तहत सात दिनों के अंदर मामला निष्पादित नहीं करने का दोषी पाते हुए मनरेगा लोकपाल ने 1000 रुपये का अर्थदंड लगाते हुए उपायुक्त को निर्देश दिया है कि वे राशि की वसूली करें और इसे बीडीओ की सेवा पुस्तिका में दर्ज करें. उधर मेराल के लखेया गांव के जुमराती अंसारी के मामले में एक कार्रवाई करते हुए श्री अंसारी पर मामला दर्ज करने के निर्देश दिये गये हैं. जुमराती अंसारी पर आरोप है कि उसने मनरेगा के तहत गलत शिकायत पत्र दर्ज कराया था, जिसमें अधिकारियों का समय व खर्च जाया हुआ है.
